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देश के विश्वविद्यालयों में हॉस्टल सीटों का कोई केंद्रीय डेटा नहीं, 4.5 करोड़ छात्र परेशान

9/9/2026, 10:53:12 pm
देश के विश्वविद्यालयों में हॉस्टल सीटों का कोई केंद्रीय डेटा नहीं, 4.5 करोड़ छात्र परेशान
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देशभर के विश्वविद्यालयों में लगभग साढ़े चार करोड़ विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन हॉस्टल सीटों का कोई केंद्रीय आंकड़ा मौजूद नहीं है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने अब तक इस जानकारी को एक जगह संग्रहीत नहीं किया। नतीजतन हर साल लाखों छात्र कैंपस के बाहर किराए के मकान या पेइंग गेस्ट में रहने को मजबूर होते हैं। कई राज्यों में नए कॉलेज खुलने के बावजूद हॉस्टल निर्माण की रफ्तार धीमी बनी हुई है। छात्र संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि यूजीसी एक राष्ट्रीय पोर्टल तैयार करे जहां प्रत्येक विश्वविद्यालय अपनी सीट क्षमता नियमित रूप से अपडेट करे। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने एक समीक्षा बैठक बुलाई, पर कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सटीक डेटा के नीति निर्माण असंभव है। निजी हॉस्टल संचालक इस खाई का फायदा उठाकर ऊंचे किराए वसूलते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके पास विकल्प कम होते हैं। कुछ विश्वविद्यालयों ने अपने स्तर पर ऑनलाइन बुकिंग शुरू की है, पर यह पहल अलग‑अलग और सीमित है। सरकार को जल्द ही एक केंद्रीय डेटाबेस बनाने और हॉस्टल निर्माण के लिए विशेष कोष आवंटित करने की जरूरत है। राज्य सरकारों के पास भी अपने स्तर पर हॉस्टल क्षमता का रिकॉर्ड नहीं है, जिससे केंद्रीय योजना बनाना मुश्किल होता है। कई विश्वविद्यालय अपने पुराने हॉस्टल भवनों की मरम्मत तक नहीं करा पाते, जबकि नए भवनों के लिए धन की कमी बनी रहती है। छात्राओं के लिए सुरक्षित आवास की कमी और भी गंभीर है, क्योंकि कई कैंपस में महिला हॉस्टल की संख्या सीमित है। कोविड महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं के बावजूद हॉस्टल मांग में कमी नहीं आई, बल्कि वापसी के बाद दबाव और बढ़ा। यूजीसी ने 2022 में एक दिशानिर्देश जारी किया था कि प्रत्येक संस्थान अपनी सीट संख्या सार्वजनिक करे, पर पालन अब भी अधूरा है। निजी क्षेत्र के हॉस्टल प्रबंधक अक्सर अनियमित शुल्क लेते हैं और सुविधाओं के नाम पर केवल नाममात्र की सेवाएं देते हैं। छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर कई बार प्रदर्शन किया, पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया धीमी रही है। एक केंद्रीय पोर्टल से पारदर्शिता आएगी और विद्यार्थी अपनी पसंद के अनुसार सीट चुन सकेंगे। साथ ही, सरकार को हॉस्टल निर्माण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन योजना शुरू करनी चाहिए, ताकि नए भवन तेजी से तैयार हों। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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