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ऑपरेशन सिंदूर: पूर्व सीडीएस चौहान ने खोला ड्रोन हादसे का राज़

25/8/2026, 4:48:02 am
ऑपरेशन सिंदूर: पूर्व सीडीएस चौहान ने खोला ड्रोन हादसे का राज़
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ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों की निगरानी के लिए एक ड्रोन अभियान चलाया। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने 25 अगस्त 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घटना का पूरा ब्योरा दिया। जनरल चौहान ने बताया कि 22 अगस्त की रात एक मानव रहित विमान (यूएवी) को किराना हिल्स स्थित परमाणु संयंत्र के ऊपर रडार और संचार सिग्नल जुटाने के लिए भेजा गया था। ड्रोन को कम ऊंचाई पर उड़ान भरनी थी ताकि दुश्मन के रडार उसे पकड़ न सकें। उड़ान के दौरान ड्रोन का ईंधन तेजी से खत्म होने लगा। कंट्रोल रूम ने ईंधन स्तर की चेतावनी दी, लेकिन ड्रोन को वापस बुलाने का समय नहीं मिला। नतीजतन ड्रोन किराना हिल्स के निकट एक खेत में गिर गया। गिरने से कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। ड्रोन का मॉडल हेरॉन टीपी था, जो लंबी दूरी की टोही उड़ानों के लिए डिज़ाइन किया गया है। पिछले साल भी इसी तरह का एक ड्रोन पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में देखा गया था, लेकिन तब वह सुरक्षित लौट आया था। इस बार तेज़ हवा और अप्रत्याशित मौसम ने ईंधन खपत बढ़ा दी। पाकिस्तान ने घटना पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह एक तकनीकी खराबी थी और किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई नहीं की गई। दोनों देशों के बीच तनाव नहीं बढ़ा। पाकिस्तानी सेना ने गिरे हुए ड्रोन को अपने कब्जे में ले लिया और उसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी। भारत ने हॉटलाइन के माध्यम से सूचना दी कि ड्रोन केवल निगरानी के लिए था और किसी भी हमले का इरादा नहीं था। दोनों पक्षों के परमाणु सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कोई भी अनधिकृत प्रवेश तुरंत रिपोर्ट किया जाता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से दोनों पक्षों की निगरानी क्षमता का पता चलता है। ड्रोन का गिरना दिखाता है कि लंबी दूरी के मिशन में ईंधन प्रबंधन कितना अहम है। भविष्य में ऐसे अभियानों के लिए अधिक ईंधन क्षमता वाले ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं। पूर्व सीडीएस ने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर का नाम पारंपरिक सिंदूर के लाल रंग से प्रेरित है, जो साहस और सतर्कता का प्रतीक माना जाता है। इस अभियान का उद्देश्य पाकिस्तान के परमाणु कमांड और कंट्रोल नेटवर्क की वास्तविक समय में जानकारी जुटाना था। जनरल चौहान ने जोर देकर कहा कि सेना पारदर्शिता रखती है और इस तरह की घटनाओं की जांच समय पर पूरी की जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रोन किसी हमले के इरादे से नहीं भेजा गया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी घटनाएँ भविष्य में दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए अहम सबक बन सकती हैं। पारदर्शी जांच और खुला संवाद तनाव कम करने में मदद करेगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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