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OTT बनाम सिनेमा: नेहरू-इंदिरा दौर में फिल्मों से गढ़े जाते थे नैरेटिव, राजा बुंदेला का खुलासा

17/8/2026, 6:20:40 am
OTT बनाम सिनेमा: नेहरू-इंदिरा दौर में फिल्मों से गढ़े जाते थे नैरेटिव, राजा बुंदेला का खुलासा
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वरिष्ठ अभिनेता और फिल्म निर्देशक राजा बुंदेला ने एक खास बातचीत में कहा है कि नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर में सिनेमा को महज मनोरंजन नहीं, बल्कि नैरेटिव गढ़ने का सशक्त हथियार माना जाता था। उन्होंने बताया कि तब सरकारी नीतियों और सामाजिक संदेशों को फिल्मों के जरिए जन-जन तक पहुंचाया जाता था। बुंदेला के मुताबिक, उस समय फिल्मकारों पर अघोषित दबाव रहता था कि वे सत्ता के अनुकूल कहानियां कहें। आज स्थिति बदल चुकी है। OTT प्लेटफॉर्म्स के आने से रचनात्मक आज़ादी का नया अध्याय शुरू हुआ है। बुंदेला मानते हैं कि अब लेखक-निर्देशक बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपनी बात कह सकते हैं। सेंसरशिप का दायरा भी सिमटा है और दर्शक भी विविध विषयों को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि पहले ग्रामीण भारत, गरीबी और समाजवाद जैसे विषयों को एक खास चश्मे से दिखाया जाता था। अब 'पंचायत' या 'मिर्जापुर' जैसी सीरीज वास्तविकता के करीब हैं। बुंदेला कहते हैं, "तब सिनेमा राष्ट्र-निर्माण का औजार था, आज वह अभिव्यक्ति का माध्यम है।" हालांकि वे सिनेमाघरों के भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। उनका मानना है कि बड़े पर्दे का सामूहिक अनुभव OTT कभी नहीं छीन सकता। दोनों माध्यम सह-अस्तित्व में रहेंगे, बस कंटेंट की गुणवत्ता तय करेगी कि दर्शक कहां जाएगा। बुंदेला ने नए फिल्मकारों को सलाह दी कि वे साहसिक विषय चुनें, मगर जिम्मेदारी से। उनके अनुसार, आज का दर्शक समझदार है और उसे बरगलाया नहीं जा सकता। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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