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पाकिस्तान में महिला बाइकर्स का संघर्ष: सड़क ही नहीं, घर से निकलना भी जंग

17/9/2026, 9:46:33 am
पाकिस्तान में महिला बाइकर्स का संघर्ष: सड़क ही नहीं, घर से निकलना भी जंग
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पाकिस्तान के बड़े शहरों में इन दिनों एक नया नजारा दिख रहा है — हेलमेट पहने, बाइक पर सवार युवतियां। पिछले हफ्ते लाहौर, कराची और इस्लामाबाद में महिला बाइकर्स ने एक साथ रैली निकाली। मकसद साफ था: सड़क पर अपना हक जताना और समाज को संदेश देना कि आवाजाही आजादी का बुनियादी हिस्सा है। बीबीसी ने रैली में शामिल कई लड़कियों से बात की। 24 साल की आयशा खान कराची में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वे कहती हैं, "बाइक चलाना मेरे लिए नौकरी तक पहुंचने का सबसे सस्ता और तेज जरिया है। लेकिन हर रोज कोई न कोई मर्द सड़क पर छींटाकशी करता है, रास्ता रोकता है या पीछा करता है।" लाहौर की 22 वर्षीया सारा अहमद कॉलेज जाती हैं। उनके अब्बू पहले सख्त खिलाफ थे। "उन्हें लगता था कि लड़की बाइक चलाएगी तो 'बिगड़' जाएगी। तीन महीने की बहस के बाद माने, पर शर्त रखी — हेलमेट हमेशा पहनना, रात आठ बजे से पहले घर आना।" आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान में सिर्फ 5% महिलाओं के पास अपना वाहन है। सार्वजनिक परिवहन में भीड़, छेड़खानी और असुरक्षा आम है। बाइक या स्कूटी उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है, मगर सामाजिक दबाव भारी पड़ता है। रैली की आयोजक निदा किरमानी कहती हैं, "यह सिर्फ सवारी का सवाल नहीं। जब एक औरत हैंडल थामती है, तो वह तय करती है कि कहां जाएगी, कब लौटेगी। यही बात कई लोगों को खटकती है।" पुलिस ने रैली को सुरक्षा दी, पर रास्ते में कई जगह रूढ़िवादी गुटों ने नारेबाजी की। सोशल मीडिया पर भी मिली-जुली प्रतिक्रिया आई — कुछ ने हौसला बढ़ाया, तो कइयों ने 'इस्लाम विरोधी' करार दिया। फिर भी, आयशा जैसे कई चेहरे हार नहीं मान रहे। "आज मैं अकेली दिखती हूं," वे मुस्कुराते हुए कहती हैं, "कल दस होंगी, परसों सौ। सड़क सबकी है।" समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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