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काग़ज़ी पार्टियाँ: अरबों की कमाई, चुनाव से दूर

4/9/2026, 10:27:32 am
काग़ज़ी पार्टियाँ: अरबों की कमाई, चुनाव से दूर
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भारत में 2,800 से ज्यादा राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने सिर्फ 73 को राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता दी है। बाकी दल काग़ज़ पर ही मौजूद हैं और चुनावी मैदान में शायद ही कभी उतरते हैं। बीबीसी की पड़ताल बताती है कि इनमें कई पार्टियाँ हर साल करोड़ों से लेकर अरबों रुपये की आय घोषित करती हैं। आय का बड़ा हिस्सा चंदे, सदस्यता शुल्क और अज्ञात स्रोतों से आता है, फिर भी ये दल किसी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारते। चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक हर पंजीकृत दल को सालाना आय‑व्यय का ब्योरा देना होता है, लेकिन कई दल इस नियम को नज़रअंदाज़ करते हैं और वित्तीय जानकारी छिपाए रखते हैं। जानकारों का मानना है कि ऐसी पार्टियाँ काले धन को सफेद करने का ज़रिया बन सकती हैं क्योंकि चंदा लेकर उसे चुनावी खर्च के नाम पर दिखाना आसान होता है जब कोई चुनाव नहीं लड़ना होता। सरकार ने हाल ही में राजनीतिक दलों की फंडिंग को लेकर नए नियम लाने का इशारा किया है, जिसमें हर दल को चंदे का स्रोत बताना अनिवार्य होगा और डिजिटल लेन‑देन को बढ़ावा दिया जाएगा। अगर ये नियम लागू हुए तो काग़ज़ी पार्टियों की संख्या घट सकती है और पारदर्शिता बढ़ेगी। फिलहाल मतदाताओं के लिए यह तय करना मुश्किल है कि कौन सी पार्टी असली है और कौन सी केवल काग़ज़ पर मौजूद है; जागरूकता और सख्त निगरानी ही इस समस्या का हल हो सकती है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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