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बंटवारे के 75 साल बाद भी महिलाओं का दर्द ताज़ा

14/8/2026, 9:43:23 am
बंटवारे के 75 साल बाद भी महिलाओं का दर्द ताज़ा
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1947 के बंटवारे ने लाखों लोगों की ज़िंदगी बदल दी। सरहद के दोनों ओर लाखों परिवार टूट गए। इतिहास में ऐसी औरतों की कहानियाँ भरी पड़ी हैं जो अपने परिवार के साथ नहीं जा सकीं। बहुत सी महिलाएँ अपने घरों में ही रह गईं क्योंकि उनके पति या भाई सरहद पार चले गए। कुछ को जबरन छोड़ दिया गया तो कुछ ने खुद ही रहने का फैसला किया। उनके पास न तो ज़मीन थी न ही कोई सहारा। विभाजन के बाद हुए दंगों और हिंसा ने महिलाओं को सबसे ज्यादा चोट पहुँचाई। बलात्कार, अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएँ आम थीं। बहुत सी पीड़िताओं ने अपनी आपबीती कभी नहीं बताई क्योंकि समाज में शर्म और डर था। आज भी उन औरतों के वंशज उनकी यादें सुनते हैं। कई परिवार अब भी उन दस्तावेज़ों और तस्वीरों को सहेजते हैं जो उस दौर की गवाही देते हैं। शोधकर्ता और लेखक इन कहानियों को सामने ला रहे हैं ताकि इतिहास अधूरा न रहे। सरकारी रिकॉर्ड में महिलाओं की संख्या कम दर्ज है क्योंकि उस समय जनगणना में उन्हें अलग से नहीं गिना गया। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि लगभग दस लाख महिलाएँ सीधे तौर पर प्रभावित हुईं। इन कहानियों को याद रखना ज़रूरी है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराई जाए। समाज को उन महिलाओं के साहस और संघर्ष को सम्मान देना चाहिए। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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