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लाल किले से मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ जुमला, परीक्षा-भर्ती विवादों पर चुप्पी

15/8/2026, 1:57:03 pm
लाल किले से मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ जुमला, परीक्षा-भर्ती विवादों पर चुप्पी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में युवाओं को लेकर बड़ी बातें कहीं। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का जिक्र करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस शब्द ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। कई जानकार मानते हैं कि यह शब्द विपक्षी विचारों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। लेकिन भाषण में उन मुद्दों का जिक्र नहीं था जो आज युवाओं को सबसे ज्यादा परेशान कर रहे हैं। परीक्षा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और नौकरी की अनिश्चितता जैसे विषय छूट गए। छात्र संगठनों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने युवाओं की आवाज सुनी ही नहीं। वे चाहते थे कि सरकार पेपर लीक की जांच तेज करे और भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनाए। विपक्षी दलों ने भी इसे ‘चुनिंदा मुद्दों पर बोलना’ बताया। उनका कहना है कि सरकार केवल वही बातें उठा रही है जो उसके एजेंडे में फिट बैठती हैं। सरकार के प्रवक्ता ने बाद में सफाई दी कि ‘दिमागी नक्सल’ का अर्थ उन विचारों से है जो विकास को रोकते हैं। उन्होंने दावा किया कि युवाओं के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। फिर भी, ज़मीन पर युवा अब भी इंतजार कर रहे हैं कि कब उनकी परेशानियों पर ठोस कदम उठेंगे। लाल किले की प्राचीर से निकली बातें तभी सार्थक होंगी जब वे असल ज़िंदगी में बदलाव लाएं। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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