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पेशाब के बाद बूंद‑बूंद टपकना न करें नज़रअंदाज़, हो सकती है गंभीर बीमारी

31/8/2026, 2:29:26 am
पेशाब के बाद बूंद‑बूंद टपकना न करें नज़रअंदाज़, हो सकती है गंभीर बीमारी
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पेशाब करने के बाद भी अगर बूंद‑बूंद टपकता रहे, अंडरवियर गीला हो जाए या शौचालय से निकलने के बाद असहजता महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें। डॉक्टरों के मुताबिक यह लक्षण कई बीमारियों की ओर इशारा करता है, मगर शर्म या झिझक के चलते पुरुष अक्सर इस पर बात नहीं करते। सबसे आम वजह प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना है, जिसे बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) कहते हैं। पचास साल की उम्र के बाद यह समस्या आम हो जाती है। यूरेथ्रा (मूत्रनली) में सिकुड़न, पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों का कमज़ोर होना, डायबिटीज या न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी इसके पीछे हो सकती हैं। लक्षणों में पेशाब टपकना, बार‑बार पेशाब आना, रात में कई बार उठना, पेशाब शुरू करने में दिक्कत या धार का कमज़ोर होना शामिल हैं। अगर ये लक्षण हफ्तों तक बने रहें, तो यूरोलॉजिस्ट से मिलना ज़रूरी है। जांच में डॉक्टर शारीरिक परीक्षण, यूरोफ्लोमेट्री, अल्ट्रासाउंड या सिस्टोस्कोपी करा सकते हैं। इलाज लक्षणों और कारण पर निर्भर करता है। शुरुआती स्टेज में जीवनशैली में बदलाव — जैसे कैफीन‑एल्कोहल कम करना, समय पर पेशाब जाना, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ (कीगल) — काफ़ी मददगार होते हैं। दवाओं में अल्फा‑ब्लॉकर्स और 5‑अल्फा रिडक्टेज इनहिबिटर्स प्रोस्टेट का आकार घटाकर लक्षण सुधारते हैं। गंभीर मामलों में TURP, लेज़र सर्जरी या यूरेथ्रल डिलेटेशन जैसे विकल्प मौजूद हैं। याद रखें, यह कोई शर्म की बात नहीं, एक आम मेडिकल कंडीशन है। समय पर इलाज जीवन की गुणवत्ता सुधारता है और किडनी या ब्लैडर को नुकसान से बचाता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना पेल्विक फ्लोर को मजबूत रखने में मदद करता है। कैफीन, अल्कोहल और मसालेदार भोजन पेशाब की इच्छा बढ़ाते हैं, इसलिए इन्हें सीमित रखें। वजन कम करना भी प्रोस्टेट पर दबाव घटाता है और लक्षणों में सुधार लाता है। अगर दवा से आराम न मिले, तो डॉक्टर सर्जिकल विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं। सर्जरी के बाद नियमित फॉलो‑अप और पेल्विक एक्सरसाइज़ जारी रखना ज़रूरी होता है। इस समस्या को छिपाने से किडनी संक्रमण या ब्लैडर स्टोन जैसी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। इसलिए लक्षण दिखते ही बिना झिझक डॉक्टर से सलाह लें और स्वस्थ जीवन जीएं। स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों और ऑनलाइन संसाधनों से पुरुष इस विषय पर खुलकर बात कर सकते हैं। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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