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गणेश उत्सव पर पुणे में 10 दिन की शराबबंदी: हाईकोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

10/9/2026, 10:10:01 pm
गणेश उत्सव पर पुणे में 10 दिन की शराबबंदी: हाईकोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे में गणेश उत्सव के दौरान लगाई गई 10 दिन की शराबबंदी पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की खंडपीठ ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पुणे पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को फटकार लगाई। अदालत ने पूछा कि इस प्रतिबंध को लगाने के लिए किस कानूनी प्रावधान का उपयोग किया गया है? याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि महाराष्ट्र शराबबंदी अधिनियम, 1949 की धारा 39(1) केवल आपातकालीन स्थितियों में ही प्रतिबंध लगाने की इजाजत देती है। त्योहार के नाम पर पूरा शहर एकसाथ बंद करना इस प्रावधान का उल्लंघन है और इससे स्थानीय दुकानदारों, होटल प्रोपराइटर तथा आम नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यापक प्रतिबंध अनुपातिक नहीं है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। प्रशासन की ओर से सरकारी अधिवक्ता ने जवाब दिया कि गणेश उत्सव के दौरान भारी भीड़ और संभावित असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए एहतियातन कदम उठाया गया था। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में इसी अवधि में शराब से संबंधित झगड़ों की संख्या बढ़ी थी, इसलिए प्रतिबंध लगाया गया। साथ ही, उन्होंने बताया कि ट्रेडर्स एसोसिएशन ने इस बंद के कारण आय में भारी गिरावट की शिकायत की है और होटल एवं रेस्टोरेंट्स को रोजगार पर असर पड़ने की आशंका जताई है। इस पर खंडपीठ ने सवाल किया कि क्या ऐसी कोई specific intelligence या डेटा मौजूद था या केवल अनुमान के आधार पर आदेश जारी कर दिया गया? अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या पड़ोसी जिलों से शराब की तस्करी रोकने के कोई बंदोबस्त किए गए हैं? यदि प्रतिबंध इतना प्रभावी है तो المجاورة क्षेत्रों में भी समान उपाय क्यों नहीं किए गए? bench ने कहा कि किसी भी प्रतिबंध का उद्देश्य होना चाहिए कि वह अनुपातिक हो और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर न्यूनतम प्रभाव डाले। वैकल्पिक उपायों के बारे में पूछे जाने पर प्रशासन ने बताया कि भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस तैनाती और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई जा सकती है, लेकिन उन्होंने इसे पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने इस सुझाव पर गौर करने को कहा और निर्देश दिया कि प्रशासन सोमवार तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे, जिसमें प्रतिबंध का कानूनी आधार, inteligencia रिपोर्ट, वैकल्पिक उपायों का विवरण तथा आर्थिक प्रभाव का आकलन शामिल होगा। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद है कि मामला जल्दी ही आगे बढ़ेगा और अदालत प्रतिबंध की वैधता पर अंतिम निर्णय लेगी।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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