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आरक्षण हटाओ आंदोलन: बीजेपी के लिए नई सियासी चुनौती

30/8/2026, 7:36:46 am
आरक्षण हटाओ आंदोलन: बीजेपी के लिए नई सियासी चुनौती
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही आरक्षण हटाओ आंदोलन ने तूल पकड़ लिया है। सवर्ण संगठनों की अगुवाई में चल रहा यह अभियान अब बीजेपी के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। पार्टी के रणनीतिक मानते हैं कि आरक्षण नीति पर खुलकर बोलना दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक तरफ सवर्ण मतदाता आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पिछड़े और दलित वर्ग किसी भी छेड़छाड़ के खिलाफ लामबंद हैं। पिछले चुनावों में बीजेपी ने गैर-यादव पिछड़े और गैर-जाटव दलितों को जोड़कर बड़ी जीत हासिल की थी। अब यही समीकरण खतरे में दिख रहा है। आरक्षण विरोधी स्वर तेज हुए तो पिछड़ा वोट बैंक खिसक सकता है, और अगर चुप रहे तो सवर्ण नाराज हो सकते हैं। विपक्षी दल इस दुविधा को भुनाने में जुटे हैं। सपा और बसपा दोनों ने आरक्षण को संवैधानिक अधिकार बताते हुए आंदोलन को भाजपा की साजिश करार दिया है। कांग्रेस भी सवर्णों को लुभाने के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत कर रही है। बीजेपी नेतृत्व फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। पार्टी प्रवक्ता बस इतना कहते हैं कि संविधान में संशोधन की जरूरत नहीं। मगर जमीनी कार्यकर्ता मानते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा हर सभा में उठेगा। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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