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भारत

रक्षाबंधन: धागे से बंधा रिश्तों का वो वचन जो सदियों से चल रहा है

27/8/2026, 12:24:34 am
रक्षाबंधन: धागे से बंधा रिश्तों का वो वचन जो सदियों से चल रहा है
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हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को देशभर में रक्षाबंधन मनाया जाता है। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। मगर यह त्योहार सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा। वक्त के साथ इसका दायरा बढ़ा और मायने भी बदले। पौराणिक कथाओं में राखी के कई प्रसंग मिलते हैं। सबसे चर्चित है द्रौपदी और कृष्ण का। कहते हैं, कृष्ण की उंगली कट गई तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर बांध दिया। कृष्ण ने इसे राखी माना और द्रौपदी की लाज बचाने का वचन दिया। चीरहरण के वक्त कृष्ण ने वही वचन निभाया। एक और कहानी राजस्थान की रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूं की है। जब गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर हमला किया, रानी ने हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी। हुमायूं ने राखी का मान रखा और सेना भेजी। हालांकि वह वक्त पर नहीं पहुंच सका, पर राखी का कर्ज उसने बाद में चुकाया। यम और यमुना की कथा भी है। यमुना ने यम को राखी बांधी तो यम ने अमरता का वरदान दिया। कहा जाता है तब से जो बहन भाई को राखी बांधती है, यम उसके भाई को अकाल मृत्यु से बचाते हैं। पहले राखी रेशम या सूत के धागे की होती थी। फिर बाजार में रंग-बिरंगी, मोती-जड़ी, चांदी-सोने की राखियां आईं। अब तो डिजाइनर राखियों का चलन है। गांवों में आज भी बहनें खुद राखी तैयार करती हैं — हल्दी, चावल, रोली लगाकर। समय के साथ रक्षाबंधन का रूप बदला। अब बहनें भी भाइयों को राखी बांधती हैं, दोस्त एक-दूसरे को, पड़ोसी भी। सेना के जवानों, पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों को राखी भेजी जाती है। कई जगह पेड़ों को राखी बांधकर पर्यावरण रक्षा का संकल्प लिया जाता है। त्योहार का बाजार भी बड़ा हुआ। मिठाई, कपड़े, गिफ्ट की बिक्री बढ़ जाती है। ऑनलाइन राखी डिलीवरी ने दूर बैठे भाई-बहनों की दूरी मिटा दी। मगर मूल भावना वही है — रिश्तों की डोर मजबूत करना, एक-दूसरे की फिक्र करना। राखी महज धागा नहीं, विश्वास की वह कड़ी है जो वक्त की हर आंधी में टिकी रहती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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