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छोटे घर और तबेले से निकले रैपर सुमित की संघर्ष गाथा

30/8/2026, 3:01:10 pm
छोटे घर और तबेले से निकले रैपर सुमित की संघर्ष गाथा
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दिल्ली की तंग गलियों में एक छोटा-सा कमरा और पास ही बना तबेला — यही वो ठिकाना है जहां से निकली आवाज़ आज हज़ारों लोगों तक पहुंच रही है। रैपर सुमित कोई रातोंरात स्टार नहीं बने। उनकी कहानी मेहनत, इंतज़ार और खुद पर यकीन की जीती-जागती मिसाल है। सुमित जब गाते हैं तो उनके बोलों में वो दर्द झलकता है जो उन्होंने जिया है। पिता मज़दूरी करते थे, मां घर संभालती थीं। पढ़ाई बीच में छूटी क्योंकि घर चलाना ज़रूरी था। तबेले में भैंसों के बीच बैठकर उन्होंने अपने पहले गीत लिखे। बीट्स के लिए फोन पर फ्री ऐप्स ढूंढे, रिकॉर्डिंग के लिए दोस्तों का सहारा लिया। "लोग कहते थे रैप गाना गली-छाप लड़कों का काम नहीं," सुमित मुस्कुराते हुए बताते हैं। "लेकिन मैंने उनकी बात नहीं मानी। मैं अपनी कहानी कहना चाहता था।" पहला गाना यूट्यूब पर डाला तो 50 व्यूज मिले। दूसरा 200 तक पहुंचा। हार नहीं मानी। हर हफ्ते एक नया ट्रैक, हर महीने बेहतर प्रोडक्शन। धीरे-धीरे स्थानीय शोज़ मिलने लगे। दिल्ली के कॉलेज फेस्ट, फिर मुंबई के छोटे वेन्यू। आज उनके चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर हैं। मगर सफलता ने जड़ें नहीं भुलाईं। सुमित अब भी उसी मोहल्ले में रहते हैं। नए लड़कों को फ्री वर्कशॉप देते हैं। "मेरे पास जो सीखा, वो बांटना चाहता हूं," वे कहते हैं। "ताकि कोई और सुमित अपनी आवाज़ दबने न दे।" उनका नया एल्बम "मिट्टी से आसमां" अगले महीने आ रहा है। गाने वही हैं — संघर्ष के, सपनों के, और उस भरोसे के जो तबेले की दीवारों से जन्मा था। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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