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साइप्रस फेरी हादसे में 8 की मौत, 22 लापता; आइसलैंड ने EU में शामिल होने से मना किया
30/8/2026, 11:19:12 pm

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साइप्रस के निकोसिया बंदरगाह से रवाना हुई एक यात्री फेरी शनिवार सुबह समुद्र में डूब गई। हादसे में अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बाईस यात्री अब भी लापता हैं। फेरी ‘मेडिटेरेनियन स्टार’ नाम से जानी जाती थी और यह निकोसिया से लारनाका की ओर जा रही थी।
बचाव दल तट रक्षक, नौसेना और निजी नौकाओं के साथ मिलकर तलाशी अभियान चला रहे हैं। मौसम खराब होने के कारण ऑपरेशन में देरी हो रही है, लेकिन अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जल्द ही और शव मिल सकते हैं। रात भर हेलीकॉप्टर और ड्रोन भी लगाए गए हैं ताकि लापता लोगों का पता लगाया जा सके।
फेरी में कुल 120 यात्री और चालक दल सवार थे। हादसे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है, मगर प्रारंभिक जांच में इंजन फेल होने और तेज लहरों की संभावना जताई जा रही है। साइप्रस सरकार ने जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की है, जिसमें समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ और न्यायिक अधिकारी शामिल हैं।
उधर, आइसलैंड में रविवार को हुए जनमत संग्रह में नागरिकों ने यूरोपीय संघ में शामिल होने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। लगभग 55 प्रतिशत मतदाताओं ने ‘नहीं’ कहा, जबकि 45 प्रतिशत ने ‘हाँ’ के पक्ष में मतदान किया। मतदान में 80 प्रतिशत से अधिक पंजीकृत मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जो देश की राजनीतिक दिलचस्पी को दर्शाता है।
आइसलैंड की प्रधानमंत्री कटरीन जैकब्सडॉटिर ने परिणाम का सम्मान करते हुए कहा कि देश अपनी आर्थिक नीतियों को स्वतंत्र रूप से चलाता रहेगा। यूरोपीय आयोग ने फैसले को स्वीकार किया, लेकिन भविष्य में व्यापार, ऊर्जा और शोध के क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने की बात कही।
दोनों घटनाएं अलग-अलग क्षेत्रों की हैं, लेकिन दोनों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा है। साइप्रस में बचाव कार्य जारी है, वहीं आइसलैंड अब अपनी विदेश नीति को नए सिरे से तय करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि साइप्रस हादसे से समुद्री सुरक्षा मानकों पर फिर से बहस शुरू होगी।
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनास्तासियादिस ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। यूरोपीय संघ की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने भी घटना की निगरानी शुरू कर दी है और नए दिशानिर्देश जारी करने की तैयारी में है।
आइसलैंड के विपक्षी दलों ने जनमत संग्रह के नतीजे को सरकार की विदेश नीति की विफलता बताया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार अब आर्थिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करे और यूरोपीय बाजारों तक पहुंच के वैकल्पिक रास्ते तलाशे।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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