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शिवसेना के धनुष‑बाण पर फिर टकराव, शिंदे ने उद्धव की मांग का किया खंडन

1/9/2026, 5:04:56 am
शिवसेना के धनुष‑बाण पर फिर टकराव, शिंदे ने उद्धव की मांग का किया खंडन
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मुंबई। शिवसेना के चुनाव चिह्न 'धनुष‑बाण' पर हक को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग से पत्र लिखकर दावा किया है कि 2022 में हुआ फैसला गलत था और पार्टी का मूल निशान उन्हें लौटाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि शिवसैनिकों और पदाधिकारियों का बड़ा हिस्सा अभी भी उनके साथ है। इस पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को संवाददाताओं से बात करते हुए कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "बालासाहेब ठाकरे ने अपनी जिंदगी में इस निशान को सींचा है। उद्धव जी अब उसी निशाने पर नजर गड़ाए बैठे हैं, लेकिन जनता सब समझती है।" शिंदे ने यह भी जोड़ा कि उनकी सरकार बालासाहेब के विचारों पर चल रही है और वही असली शिवसेना है। उद्धव ठाकरे ने पलटवार करते हुए कहा कि चुनाव चिह्न कोई संपत्ति नहीं जिसे कोई हथिया ले। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे गुट ने धनबल और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करके पार्टी तोड़ी है। ठाकरे ने भरोसा जताया कि चुनाव आयोग न्याय करेगा और मूल शिवसेना को उसका हक मिलेगा। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार उद्धव गुट की अर्जी पर विचार चल रहा है। आयोग दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही कोई फैसला लेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले मुंबई महानगरपालिका चुनाव इस प्रतीक के विवाद से प्रभावित हो सकते हैं। दोनों गुटों ने अपने‑अपने समर्थकों को जुटाना शुरू कर दिया है। posteers, बैनर और सोशल मीडिया पर धनुष‑बाण का चित्र लगाकर जनता के मन में अपनी बात रखने की कोशिश हो रही है। कई जगह दीवार कलाकारों ने इस प्रतीक को रंगों से सजाया है, जिससे पता चलता है कि यह निशान सिर्फ एक चुनाव चिह्न नहीं, बल्कि मराठी अभिमान का प्रतीक भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग अक्सर विधायकों‑सांसदों के बहुमत को आधार बनाता है, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव भी उसके निर्णय में भूमिका निभा सकता है। अब देखना होगा कि आयोग का क्या verdict आता है और इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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