लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग बने दुनिया के सबसे महंगे प्रधानमंत्री, 27 करोड़ वेतन

9/9/2026, 2:46:08 am
सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग बने दुनिया के सबसे महंगे प्रधानमंत्री, 27 करोड़ वेतन
Original publisher image
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग को अब दुनिया का सबसे महंगा प्रधानमंत्री माना जा रहा है। सरकार ने उनकी वार्षिक तनख्वाह बढ़ाकर लगभग 27 करोड़ रुपये कर दी है। इस बढ़ोतरी के बाद वे अमेरिका के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री से भी आगे निकल गए हैं। वोंग की नई सैलरी में मूल वेतन, भत्ते और बोनस शामिल हैं। सिंगापुर की संसद ने इस प्रस्ताव को पिछले महीने मंजूरी दी थी। वहां के नियमों के मुताबिक प्रधानमंत्री का वेतन देश के शीर्ष नौकरशाहों के वेतन से जुड़ा होता है। इसलिए जब वरिष्ठ अधिकारियों की तनख्वाह बढ़ी, तो प्रधानमंत्री का वेतन भी अपने आप बढ़ गया। आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम एक छोटे देश के लिए असंगत है। वहीं सरकार का तर्क है कि प्रतिभाशाली नेताओं को आकर्षित करने के लिए ऐसा करना जरूरी है। सिंगापुर की अर्थव्यवस्था मजबूत है और प्रति व्यक्ति आय दुनिया में सबसे ऊंची है। इस वजह से सरकार मानती है कि उच्च वेतन भ्रष्टाचार रोकने में मदद करता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस खबर को प्रमुखता से छापा है। भारत में भी सोशल मीडिया पर लोग तुलना कर रहे हैं। कुछ यूजर्स ने मजाक में लिखा कि अब वोंग को अपने वेतन का हिस्सा दान करना चाहिए। हालांकि आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वेतन वृद्धि पारदर्शी प्रक्रिया से हुई है। भविष्य में भी सिंगापुर अपने नेताओं के वेतन की समीक्षा करता रहेगा। वोंग का मूल वेतन अब 1.2 करोड़ रुपये मासिक है, जबकि भत्ते और बोनस मिलाकर सालाना 27 करोड़ तक पहुंचता है। अमेरिकी राष्ट्रपति को सालाना लगभग 4 लाख डॉलर मिलते हैं, जो भारतीय मुद्रा में करीब 3.3 करोड़ रुपये होते हैं। भारत के प्रधानमंत्री को सालाना लगभग 2.5 करोड़ रुपये वेतन और भत्ते मिलते हैं। सिंगापुर ने 1990 के दशक में भी अपने नेताओं के वेतन को बाजार दर के अनुरूप रखा था। इस नीति का मकसद था कि लोकसेवक निजी क्षेत्र के समान वेतन पाएं और भ्रष्टाचार न करें। विपक्षी दलों ने भी इस बढ़ोतरी पर कोई बड़ा विरोध दर्ज नहीं कराया है। जनमत सर्वेक्षण में 62 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उच्च वेतन उचित है क्योंकि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अन्य छोटे देशों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित