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स्लोवेनिया ने इस्राइल के लिए खोला पहला दूतावास, फलस्तीन समर्थन के बाद बदला रुख

9/9/2026, 9:40:46 pm
स्लोवेनिया ने इस्राइल के लिए खोला पहला दूतावास, फलस्तीन समर्थन के बाद बदला रुख
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स्लोवेनिया, मध्य यूरोप का छोटा लेकिन सक्रिय सदस्य देश, लंबे समय तक फलस्तीन के अधिकारों के पक्ष में अपनी आवाज उठाता रहा है। यूरोपीय संघ के कई मंचों पर उसने इस्राइल-फलस्तीन संघर्ष में संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन उसके बयान अक्सर फलस्तीन के समर्थन में tilted रहे। हाल के महीनों में हालांकि उसके रुख में स्पष्ट बदलाव दिखा है। ल्यूब्लजाना में एक औपचारिक समारोह के दौरान, स्लोवेनिया ने इस्राइल के लिए अपना पहला दूतावास खोला। इस अवसर पर स्लोवेनिया के उप प्रधानमंत्री और इस्राइल के विदेश मंत्री दोनों मौजूद थे। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार, तकनीक और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। दूतावास का उद्घाटन न केवल राजनयिक संबंधों का नया चरण है, बल्कि स्लोवेनिया की विदेश नीति में हो रहे व्यापक पुनर्मूल्यांकन को भी दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम यूरोपीय संघ के भीतर उन देशों की बढ़ती लहर का हिस्सा है, जो इस्राइल के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को गहरा करना चाहते हैं। स्लोवेनिया सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह फलस्तीन के प्रति अपना ऐतिहासिक समर्थन नहीं छोड़ रही है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि दूतावास खोलने से उसकी नीति में किसी तरह का त्याग नहीं हुआ; बल्कि वह विविध राजनयिक संबंधों को बनाना चाहती है ताकि क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान दे सके। कुछ मानवाधिकार समूहों ने इस कदम को चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि फलस्तीन के प्रति समर्थन में कमी आ सकती है, जिससे शांति प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। स्लोवेनिया के अधिकारियों ने इन चिंताओं को सुनते हुए कहा कि वे मानवाधिकार मुद्दों पर निरंतर बातचीत जारी रखेंगे और फलस्तीन के अधिकारों के संरक्षण के लिए यूरोपीय संघ के Rahmen में काम करते रहेंगे। अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से स्लोवेनिया को इस्राइल की उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन और रक्षा क्षेत्र में प्रवेश मिल सकता है। इसके बदले में स्लोवेनिया यूरोपीय बाजार में इस्राइल के उत्पादों तक बेहतर पहुँच प्राप्त कर सकता है। इस विकास को देखते हुए, क्षेत्रीय राजनीतिक गतिशीलता में आगे क्या बदलाव आएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, स्लोवेनिया का यह कदम दर्शाता है कि छोटे देश भी अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को समय के अनुसार बदल सकते हैं, जबकि अपने ऐतिहासिक posicion को बनाए रखते हुए नए अवसरों की ओर बढ़ रहे हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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