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श्रीलंका का दो टूक संदेश: भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जमीन नहीं देंगे

9/9/2026, 12:46:15 am
श्रीलंका का दो टूक संदेश: भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जमीन नहीं देंगे
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श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर बेहद साफ लहजे में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका की जमीन का इस्तेमाल किसी भी सूरत में भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर भारत चिंतित रहा है। दिसानायके ने कोलंबो में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। उनका लहजा दो टूक था — "हम अपनी संप्रभुता का सम्मान करते हैं और दूसरों की भी करते हैं। लेकिन हम अपनी धरती को किसी के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देंगे, खासकर भारत के खिलाफ।" राष्ट्रपति ने यह भी जोड़ा कि श्रीलंका सभी पड़ोसियों के साथ बराबर और सम्मानजनक रिश्ते चाहता है। कूटनीतिक हलकों में इस बयान को चीन के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। पिछले कुछ सालों में चीन ने श्रीलंका में बंदरगाह, हवाई अड्डे और दूसरे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भारी निवेश किया है। हंबनटोटा बंदरगाह 99 साल के पट्टे पर चीन को दिया गया था, जिसे लेकर भारत लंबे समय से आशंकित रहा है। श्रीलंका के नए राष्ट्रपति का यह रुख भारत के लिए राहत भरा है। भारत और श्रीलंका के रिश्ते सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक रूप से गहरे रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग और रक्षा सहयोग लगातार बढ़ा है। दिसानायके की सरकार ने पद संभालते ही भारत को प्राथमिकता देने के संकेत दिए थे। उनका यह ताजा बयान उसी कड़ी का हिस्सा है। विश्लेषकों का मानना है कि श्रीलंका अपनी आर्थिक मुश्किलों से निकलने के लिए भारत की मदद चाहता है। आईएमएफ बेलआउट पैकेज में भारत ने अहम भूमिका निभाई थी। साथ ही, श्रीलंका नहीं चाहता कि वह किसी बड़ी ताकत के जियो-पॉलिटिकल खेल का मोहरा बने। चीन की ओर से इस बयान पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन बीजिंग के रणनीतिक हलकों में इसे अपने प्रभाव में कमी के तौर पर देखा जा सकता है। भारत के लिए यह स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि हिंद महासागर की सुरक्षा उसके लिए सर्वोपरि है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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