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भारत

चीनी के बाद दाल‑चावल‑तेल भी महंगे, त्योहारों से पहले रसोई का बजट बढ़ा

25/8/2026, 4:24:41 am
चीनी के बाद दाल‑चावल‑तेल भी महंगे, त्योहारों से पहले रसोई का बजट बढ़ा
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चीनी के दाम पिछले महीने 5 प्रतिशत तक चढ़े हैं। सरकार ने निर्यात शुल्क बढ़ाया और घरेलू स्टॉक कम होने का हवाला दिया। इसका असर अब दूसरी जरूरी चीजों पर भी दिख रहा है। दाल, चावल, खाद्य तेल और प्याज के खुदरा भाव एक साथ ऊपर जा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि मानसून की अनियमित बारिश से फसल उत्पादन प्रभावित हुआ। खासकर दलहन और तिलहन की पैदावार कम रही। केंद्र ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया, फिर भी मंडियों में आवक कम है। इससे थोक भाव 30‑35 रुपये किलो तक पहुंच गए। खाद्य तेल के आयात शुल्क में कटौती के बावजूद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची हैं। इससे घरेलू खुदरा दाम 10‑12 फीसदी बढ़े। चावल की खरीद में सरकारी एजेंसियों की खरीद कम होने से बाजार में आपूर्ति घटी। खुदरा में बासमती और सामान्य चावल दोनों महंगे हुए। त्योहारों के करीब आने से मांग अचानक बढ़ी। उपभोक्ता स्टॉक जमा कर रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव और बढ़ा। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले दो‑तीन महीनों में महंगाई दर 6‑7 फीसदी के आसपास रह सकती है। रिजर्व बैंक की नीतिगत दरें भी इसी दिशा में हैं। सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अतिरिक्त गेहूं और चावल बांटने की घोषणा की है, पर यह केवल गरीब परिवारों तक सीमित है। आम आदमी को राहत के लिए विशेष सब्सिडी या मूल्य नियंत्रण उपायों की मांग तेज हो रही है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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