लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

चीनी के दाम लगातार चौथे दिन ₹60 से नीचे, आयात ने कीमतों को संतुलित किया

14/9/2026, 7:54:16 pm
चीनी के दाम लगातार चौथे दिन ₹60 से नीचे, आयात ने कीमतों को संतुलित किया
Original publisher image
लगातार चौथे दिन देश में चीनी की थोक कीमत ₹60 प्रति किलो से नीचे बनी हुई है। बाजार सूत्रों के अनुसार इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण निर्यात‑आयात नीति में की गई ढील है, जिससे विदेशी बंदरगाहों से चीनी की खेपें तेज़ी से पहुंच रही हैं। पिछले सप्ताह केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने आयात शुल्क में कमी की घोषणा की, जिसके बाद कांडला, मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर daily औसत आयात 15‑20 प्रतिशत बढ़ गया है। थोक विक्रेताओं का कहना है कि स्थानीय मिलों का उत्पादन मौसमी कारणों से थोड़ा कम रहा है, लेकिन आयातित चीनी की उपलब्धता ने इस अंतर को पूरा कर दिया है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में खुदरा दुकानदारों ने देखा कि ग्राहकों को अब पिछले हफ्ते की तुलना में प्रति किलो दो‑तीन रुपये कम भुगतान करना पड़ रहा है। यह बचत मध्यम आय वाले परिवारों के मासिक बजट में खाद्य पदार्थों पर खर्च को थोड़ा कम करती है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न divulge करने की शर्त पर कहा, "हमारा उद्देश्य बाजार में अस्थिरता को कम करना है। आयात नीति में लचीलापन बनाकर हम आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने आगे बताया कि यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें स्थिर रहती हैं तो यह नीति अगले दो‑तीन महीनों तक जारी रह सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आयात की यह गति बनी रही तो आने वाले हफ्तों में चीनी का भाव और भी नीचे जा सकता है, जिससे खाद्य तेल और दाल जैसी अन्य आवश्यक वस्तुओं पर भी अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। हालांकि, वे चेतावनी भी देते हैं कि अचानक नीति में बदलाव या अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति में व्यवधान आने पर कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। मिठाई उद्योग के प्रतिनिधियों ने बताया कि कम कीमतों के चलते उत्पादन लागत में कमी आई है, जिससे उन्होंने अपने उत्पादों की कीमतों में मामूली कमी की है। इससे त्योहारी सीजन में मिठाई की मांग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कम कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो वे नए स्वाद और पैकेजिंग पर निवेश बढ़ा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को घरेलू उत्पादन को भी प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि आयात पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके। उन्होंने miglior बीज विकसित करने, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और किसानों को उचित समर्थन मूल्य देने की बात कही। ऐसा करने से लंबे समय में चीनी की कीमतें स्थिर रह सकती हैं और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत हो सकती। अंत में, व्यापारिक मंडलों ने मांग की है कि निगरानी प्रणाली को और सुदृढ़ किया जाए ताकि किसी भी अचानक मूल्य उछाल का तुरंत पता लगाया जा सके और आवश्यक कदम उठाए जा सकें। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित