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सुप्रीम कोर्ट आज उद्योग की परिभाषा पर सुनाएगा बड़ा फैसला, लाखों कर्मचारियों का भविष्य दांव पर

19/8/2026, 11:30:43 pm
सुप्रीम कोर्ट आज उद्योग की परिभाषा पर सुनाएगा बड़ा फैसला, लाखों कर्मचारियों का भविष्य दांव पर
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सुप्रीम कोर्ट आज ‘उद्योग’ शब्द की कानूनी परिभाषा पर अपना फैसला सुनाएगा। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली नौ जजों की संविधान पीठ इस मुद्दे पर कई हफ्तों की लंबी सुनवाई के बाद निर्णय देगी। मामले का केंद्र यह है कि कौन‑से संस्थान, कारोबारी गतिविधियाँ और सेवा क्षेत्र ‘उद्योग’ के दायरे में आएंगे, क्योंकि इसी पर श्रम कानून, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और ग्रेच्युटी जैसे प्रावधानों की लागू होना तय होता है। वकील और श्रम संगठन मानते हैं कि एक स्पष्ट और संतुलित परिभाषा से नियोक्ताओं को नियमों का पालन करने में आसानी होगी और लाखों कर्मचारियों को अपने हक़ — जैसे न्यूनतम वेतन, बोनस और सामाजिक सुरक्षा — की पक्की गारंटी मिलेगी। उधर, कई उद्योग संघ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि परिभाषा बहुत व्यापक रखी गई तो छोटे और मझोले कारोबारों पर अनावश्यक कागजी कार्यवाही और वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा, जिससे रोज़गार सृजन प्रभावित हो सकता है। अदालत ने पिछली सुनवाइयों में दोनों पक्षों के तर्कों को बारीकी से सुना, संवैधानिक प्रावधानों, 1978 के ‘बेंगलुरु वाटर सप्लाई’ फैसले और हाल के आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण किया। निर्णय आने के बाद केंद्र सरकार को नई परिभाषा के अनुरूप औद्योगिक विवाद अधिनियम, ईपीएफ एक्ट और ग्रेच्युटी एक्ट में संशोधन के लिए दिशा‑निर्देश जारी करने पड़ सकते हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला न केवल मौजूदा विवादों को सुलझाएगा, बल्कि भविष्य में उद्योग‑श्रम संबंधों के किसी भी मामले में मार्गदर्शक सिद्ध होगा। न्यायमूर्तियों की पीठ ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखते हुए आर्थिक विकास और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन कायम करना है। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद मीडिया, विधि विशेषज्ञ और ट्रेड यूनियन इसकी व्याख्या शुरू कर देंगे, जिससे असर का अंदाजा लगाना आसान होगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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