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सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों में जजों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल की, बाकी राज्यों में अड़चन

3/9/2026, 11:49:47 pm
सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों में जजों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल की, बाकी राज्यों में अड़चन
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सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर 2026 को एक अहम फैसला सुनाते हुए सात राज्यों में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष निर्धारित कर दी। फैसले के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के हाईकोर्ट पहले ही 62 साल की उम्र तय कर चुके थे, लेकिन राज्य सरकारों ने अब तक अधिसूचना जारी नहीं की थी। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 217 का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों को यह अधिकार है, परंतु केंद्र की मंजूरी अनिवार्य है, इसलिए अधिसूचना जारी होने के बाद ही नई आयु प्रभावी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्यों से प्राप्त अधिसूचनाओं को तेजी से स्वीकृत करे, ताकि लगभग 1,200 न्यायिक अधिकारी तत्काल लाभ उठा सकें। दूसरी ओर, शेष 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मामला अभी अटका हुआ है; कुछ राज्यों में हाईकोर्ट ने आयु वृद्धि का प्रस्ताव नहीं भेजा, कुछ में राज्य सरकार ने वित्तीय बोझ का हवाला देकर अधिसूचना रोक रखी है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे देश में एक समान सेवानिवृत्ति आयु होने से न्यायिक व्यवस्था में स्थिरता और अनुभव का लाभ मिलेगा, पर राज्यों की आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक प्रक्रिया देरी की मुख्य वजह हैं। पहले अधिकांश राज्यों में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 वर्ष थी, जिससे अनुभवी जज जल्दी सेवानिवृत्त हो जाते थे और लंबित मामलों का बोझ बढ़ता था। नई आयु सीमा से जजों को दो वर्ष अतिरिक्त सेवा मिलेगी, जिससे वे जटिल मुकदमों को पूरा कर सकेंगे और नए जजों के प्रशिक्षण में भी मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने भी इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि वह राज्यों के साथ मिलकर अधिसूचना प्रक्रिया को सरल बनाएगी। अदालत ने अगली सुनवाई में सभी राज्यों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और उम्मीद जताई कि जल्द ही बाकी राज्यों में भी 62 वर्ष की सेवानिवृत्ति लागू हो जाएगी। इस फैसले से न्यायपालिका में अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे मुकदमों के निपटारे में तेजी आने की संभावना है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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