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होर्मुज में तनाव: यूएई के दो टैंकरों पर हमला, ईरान पर आरोप

14/8/2026, 2:09:19 am
होर्मुज में तनाव: यूएई के दो टैंकरों पर हमला, ईरान पर आरोप
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होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर हमला हुआ है। अमेरिका और ब्रिटेन ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान ने आरोपों को खारिज किया है। पहला टैंकर 'एमटी मर्सर स्ट्रीट' गुरुवार को होर्मुज के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था। उस पर ड्रोन से हमला हुआ। दो चालक दल के सदस्य मारे गए — एक ब्रिटिश, एक रोमानियाई। जहाज जापानी कंपनी का है लेकिन इसका संचालन इजराइली फर्म जोडियाक मैरीटाइम करती है। दूसरा टैंकर 'एमटी पैसिफिक जिरकॉन' शनिवार को इसी इलाके में निशाना बना। कोई हताहत नहीं हुआ। यह टैंकर सिंगापुर की कंपनी का है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने कहा, "ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ा है।" अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी ईरान को दोषी बताया। दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर "समुचित जवाब" की चेतावनी दी। इजराइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने सीधे ईरान पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "ईरान आतंकवाद फैला रहा है।" ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबजादे ने कहा, "ये आरोप निराधार हैं। ईरान क्षेत्र में शांति चाहता है।" ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर हुसैन सलामी ने चेतावनी दी, "कोई भी हमला ईरान की सुरक्षा को खतरे में डालेगा तो कड़ा जवाब मिलेगा।" ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के सलाहकार ने भी बयान दिया कि पश्चिम झूठे आरोप लगा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। यहां तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। तेल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। विश्लेषकों का कहना है कि अगर तनाव बढ़ा तो कीमतें 80 डॉलर तक जा सकती हैं। भारत के लिए भी चिंता की बात है। भारत अपनी तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, "हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं। नौवहन की सुरक्षा जरूरी है।" पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों से वैकल्पिक रास्ते तलाशने को कहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने भी आपात बैठक बुलाई है। क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ा दी गई है। ब्रिटेन ने भी अपना युद्धपोत तैनात किया है। जानकार मानते हैं कि तनाव लंबा खिंचा तो सप्लाई चेन बाधित होगी। महंगाई बढ़ेगी। भारत समेत आयातक देशों पर दबाव पड़ेगा। फिलहाल कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। ओमान और कतर मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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