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तिब्बत में बादल फटने से सैकड़ों मरे, खबरों पर पूरी पाबंदी

29/8/2026, 2:07:12 am
तिब्बत में बादल फटने से सैकड़ों मरे, खबरों पर पूरी पाबंदी
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तिब्बत के शिगात्से इलाके में बुधवार को बादल फटने से आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग उतने ही लोग अब भी लापता हैं। घर, सड़कें और पुल बह गए हैं। राहत टीमें पहुंचने में मुश्किल हो रही है क्योंकि कई गांव पूरी तरह कट चुके हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस आपदा की खबरें दुनिया तक मुश्किल से पहुंच रही हैं। चीन ने तिब्बत में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। सोशल मीडिया पर बाढ़ से जुड़ी पोस्ट ढूंढना लगभग नामुमकिन है। पत्रकारों और विदेशी पर्यवेक्षकों के इलाके में जाने पर रोक है। निर्वासित तिब्बती संगठनों का कहना है कि चीनी प्रशासन मरने वालों की असली संख्या छिपा रहा है। उनके मुताबिक दूरदराज के गांवों में नुकसान कहीं ज्यादा है। उधर, बीजिंग ने अब तक कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। सरकारी मीडिया सिर्फ 'राहत कार्य जारी' जैसी सामान्य बातें बता रहा है। भारत के लिए भी यह चिंता की बात है। ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से ही निकलती है और वहां बने बांधों या भूस्खलन से नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ आ सकती है। अरुणाचल प्रदेश और असम के अधिकारी नदी के जलस्तर पर नजर रखे हुए हैं। जानकार मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की वजह से हिमालयी क्षेत्र में ऐसी अचानक बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। मगर तिब्बत में सूचनाओं पर पूर्ण नियंत्रण होने से न तो सही आकलन हो पाता है और न ही समय पर अंतरराष्ट्रीय मदद मिल पाती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कई परिवारों को छत पर चढ़ना पड़ा। बचाव दल हेलीकॉप्टर से रस्सी डालकर लोगों को निकाल रहे हैं, लेकिन खराब मौसम और पहाड़ी रास्तों की वजह से ऑपरेशन धीमा है। कई गांवों में बिजली और पीने का पानी पूरी तरह बंद हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चीन से अपील की है कि वह तिब्बत में सूचना की आजादी दे ताकि सही हालात पता चल सकें। संयुक्त राष्ट्र के आपदा प्रबंधन विभाग ने भी अपनी टीम भेजने की पेशकश की है, लेकिन अब तक कोई मंजूरी नहीं मिली है। पहले भी 2018 और 2020 में तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में बादल फटने से बड़ी बाढ़ आई थी, तब भी जानकारी बाहर आने में कई दिन लगे थे। विशेषज्ञ कहते हैं कि ग्लेशियर पिघलने और असामान्य बारिश का मेल इस क्षेत्र को और भी संवेदनशील बना रहा है। फिलहाल भारतीय मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग मिलकर ब्रह्मपुत्र के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। अगर जलस्तर खतरे के निशान को पार करता है तो असम और अरुणाचल के निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया जाएगा। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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