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कोलकाता में टीएमसी दफ्तर पर हमला, अभिषेक बनर्जी ने भाजपा को ठहराया जिम्मेदार

3/9/2026, 3:41:53 am
कोलकाता में टीएमसी दफ्तर पर हमला, अभिषेक बनर्जी ने भाजपा को ठहराया जिम्मेदार
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कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दफ्तर में शुक्रवार रात तोड़फोड़ की घटना सामने आई। यह वही दफ्तर है जहां पिछले हफ्ते एक बिलबोर्ड को लेकर टीएमसी और भाजपा के बीच विवाद हुआ था। घटना के बाद टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए भाजपा समर्थकों पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमला सुनियोजित था और हमलावरों ने दफ्तर के फर्नीचर, कंप्यूटर और कागजात तोड़ डाले। अभिषेक ने पुलिस पर भी सवाल उठाए और कहा कि पुलिस ने घटना की सूचना मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की। पुलिस आयुक्त ने बताया कि मामले की जांच शुरू हो चुकी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि रात करीब नौ बजे कुछ अज्ञात लोग दफ्तर में घुसे और तोड़फोड़ करने लगे। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि हमलावरों के हाथ में लाठी और पत्थर थे और वे नारे लगा रहे थे। अभिषेक बनर्जी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, "भाजपा के गुंडे हमारे दफ्तर को निशाना बना रहे हैं, पुलिस चुप है।" भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना की निंदा की और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी। इस घटना से राज्य की राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पुलिस ने अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की है, लेकिन जांच तेजी से चल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले चुनावों पर असर डाल सकती है। बिलबोर्ड विवाद की शुरुआत तब हुई जब टीएमसी ने अपने दफ्तर के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगाया, जिसे भाजपा ने अवैध बताया। उसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी हुई और मामला थाने तक पहुंचा। पुलिस ने तब दोनों पक्षों को समझौता करने की सलाह दी, लेकिन तनाव बना रहा। शुक्रवार की घटना से साफ है कि विवाद अब हिंसक रूप ले चुका है। नागरिक समाज के कई संगठनों ने शांति की अपील की है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। चुनाव आयोग ने भी घटना का संज्ञान लिया है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि चुनावी माहौल में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। टीएमसी के स्थानीय नेताओं ने दफ्तर की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने निजी सुरक्षा गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव भी रखा। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने दावा किया कि उनके कार्यकर्ता किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि टीएमसी अपने राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है। पुलिस ने दफ्तर के आसपास अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है। सीसीटीवी फुटेज में कुछ संदिग्ध चेहरे देखे गए हैं, जिनकी पहचान की जा रही है। स्थानीय अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में क्या सामने आता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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