लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

ट्रंप का भारत के ख़िलाफ़ नया हथियार, विशेषज्ञ बोले – मामला रूस से आगे

19/9/2026, 7:09:14 am
ट्रंप का भारत के ख़िलाफ़ नया हथियार, विशेषज्ञ बोले – मामला रूस से आगे
Original publisher image
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ एक नया राजनीतिक हथियार उठाया है, जिसे विशेषज्ञ रूस से आगे का मामला बता रहे हैं। पूर्व विदेश सचिव और अमेरिका में भारत की राजदूत रहीं निरूपमा मेनन राव कहती हैं कि दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरी केवल रूसी तेल तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार व्यापार नीति, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर मतभेद गहरा रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत पर नए प्रतिबंध लगाए, जिनमें उच्च‑तकनीक उपकरणों की बिक्री पर रोक शामिल है। अमेरिकी कांग्रेस में भी इस कदम पर बहस हुई, कई सांसदों ने चेतावनी दी कि इससे दोनों लोकतंत्रों के बीच भरोसा कमजोर होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की यह रणनीति घरेलू मतदाताओं को आकर्षित करने के साथ‑साथ चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश भी है। रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखी, पर यह मुद्दा अब बड़े भू‑राजनीतिक खेल का हिस्सा बन चुका है। क्वाड समूह में भी तनाव दिख रहा, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। भारत ने जवाब में निर्यात बाजार को विविध बनाने और स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत करने की योजना घोषित की। व्यापार घाटा बढ़ने से अमेरिकी कारोबारी समूह भारत पर दबाव डाल रहे हैं कि वह बाजार खोले और बौद्धिक संपदा संरक्षण मजबूत करे। प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच चाहिए, जबकि भारत डेटा स्थानीयकरण की मांग पर अड़ा है। रक्षा सौदों में भी मतभेद सामने आए, अमेरिका चाहता है कि भारत उसके प्लेटफॉर्म खरीदे, पर भारत स्वदेशी विकल्पों पर जोर दे रहा है। रणनीतिक स्तर पर दोनों देश हिंद‑प्रशांत में चीन की चुनौती से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन विश्वास की कमी बाधा बन रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बातचीत जल्द शुरू नहीं हुई तो द्विपक्षीय संबंधों में लंबी अवधि की अनिश्चितता बनी रह सकती है। निरूपमा राव ने सुझाव दिया कि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटें ताकि गलतफहमियां दूर हों और साझा हितों की रक्षा हो सके। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है और आने वाले महीनों में इसका असर द्विपक्षीय समझौतों पर पड़ सकता है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

संबंधित