लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

ट्रंप प्रशासन ने श्वेत व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव के आरोपों पर कार्रवाई की घोषणा की, दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया

17/9/2026, 2:22:27 am
ट्रंप प्रशासन ने श्वेत व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव के आरोपों पर कार्रवाई की घोषणा की, दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया
Original publisher image
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में एक बयान जारी करके कहा कि अमेरिका में श्वेत नागरिकों के प्रति कथित भेदभाव के मामलों पर अब त्वरित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने इस कदम को संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के हिस्से के रूप में बताते हुए कहा कि किसी भी समूह के खिलाफ पक्षपात को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बयान में कहा गया कि हाल के महीनों में कुछ सामाजिक संस्थाओं और मीडिया प्लेटफॉर्म पर श्वेत लोगों के खिलाफ पूर्वाग्रहपूर्ण टिप्पणियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों को जांच शुरू करने और आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। इसी कड़ी में ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण अफ्रीका के कई सरकारी अधिकारियों पर यात्रा प्रतिबंध और वित्तीय प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इन अधिकारियों में राजनयिक मिशन के कर्मचारी, व्यापार प्रतिनिधि और कुछ नीति सलाहकार शामिल हैं। प्रशासन का आरोप है कि इन व्यक्तियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका की नीतियों की आलोचना करते हुए श्वेत आबादी के प्रति पक्षपातपूर्ण रुख अपनाया है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा हो रहा है। प्रशासन के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी विशेष राष्ट्र या समुदाय को लक्षित करके नहीं की गई है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सभी नागरिकों के अधिकारों की समान रूप से रक्षा हो। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध अस्थायी होंगे और जांच पूरी होने के बाद उनकी समीक्षा की जाएगी। दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रतिबंध एकतरफा और बिना पर्याप्त सबूत के लगाए गए हैं। प्रिटोरिया ने कहा कि वह द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से मुद्दे का समाधान निकालना चाहती है और ऐसे कदमों से दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठनों ने भी इस मामले पर नजर रखने की बात कही है, हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय mainly domestic political संदर्भ में लिया गया है, जहाँ मतदाता वर्ग के एक segment को शांत करने की कोशिश की जा रही है। वे कहते हैं कि आगामी चुनावों को देखते हुए प्रशासन अपने आधार को मजबूत करने के लिए ऐसे संवेदनशील मुद्दे को उठा रहा है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

संबंधित