लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

हल्दी हर मर्ज की दवा नहीं, विशेषज्ञों की चेतावनी

15/8/2026, 1:36:35 am
हल्दी हर मर्ज की दवा नहीं, विशेषज्ञों की चेतावनी
Original publisher image
भारत में हल्दी रसोई, पूजा और घरेलू नुस्खों का अभिन्न हिस्सा है। कई लोग मानते हैं कि रोज़ एक चम्मच हल्दी दूध में मिलाकर पीने से कैंसर, मधुमेह, जोड़ों का दर्द और यहाँ तक कि कोविड तक ठीक हो सकता है। वैज्ञानिक अध्ययन इस दावे को पूरी तरह समर्थन नहीं देते। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन में सूजन रोधी और एंटी‑ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान से बचा सकते हैं। लेकिन कच्ची हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा बहुत कम होती है और शरीर इसे ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता। क्लिनिकल ट्रायल दिखाते हैं कि दिन में 500‑1000 मिलीग्राम करक्यूमिन की उच्च खुराक कुछ स्थितियों में लाभ दे सकती है, पर इसके लिए मानकीकृत सप्लीमेंट ज़रूरी हैं। सामान्य रसोई में इस्तेमाल होने वाली मात्रा से ऐसा असर नहीं मिलता। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि काली मिर्च में मौजूद पाइपेरिन और वसा के साथ लेने पर करक्यूमिन का अवशोषण कई गुना बढ़ जाता है। फिर भी, बाज़ार में बिकने वाले कई हल्दी सप्लीमेंट्स में मानकीकृत करक्यूमिन की मात्रा स्पष्ट नहीं होती, जिससे उपभोक्ता को सही खुराक मिलना मुश्किल होता है। अधिक मात्रा में हल्दी या करक्यूमिन लेने से पेट खराब, दस्त, खून पतला होने का खतरा और कुछ दवाओं के साथ परस्पर क्रिया हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, पित्ताशय की पथरी वाले और खून पतला करने वाली दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टर और आयुर्वेद विशेषज्ञ दोनों यही सलाह देते हैं: हल्दी को मसाले की तरह इस्तेमाल करें, स्वास्थ्य लाभ के लिए केवल पूरक आहार के रूप में न लें। किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए हमेशा चिकित्सक की राय लें। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

संबंधित