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यूएई ने 7 अक्टूबर से 10 दिन पहले नेतन्याहू को किया था आगाह, रिपोर्ट में खुलासा

8/9/2026, 1:36:37 am
यूएई ने 7 अक्टूबर से 10 दिन पहले नेतन्याहू को किया था आगाह, रिपोर्ट में खुलासा
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नई दिल्ली: एक नई रिपोर्ट ने इस्राइल की राजनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 7 अक्टूबर के हमास हमले से दस दिन पहले ही इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। यह खुलासा ऐसे समय हुआ जब इस्राइल गाजा में जंग लड़ रहा है और नेतन्याहू सरकार पर खुफिया नाकामी के आरोप लग रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यूएई ने अपने खुफिया सूत्रों के हवाले से नेतन्याहू को बताया था कि हमास एक बड़ा ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में है। इसके बावजूद इस्राइली खुफिया एजेंसियों ने खतरे को गंभीरता से नहीं लिया। विपक्षी नेताओं ने इस खुलासे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। येश एटिड पार्टी के प्रमुख येर लापिद ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को पहले से पता था तो उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की। लिकुड पार्टी के कुछ सांसदों ने भी जांच की मांग की है। नेतन्याहू के कार्यालय ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। यूएई और इस्राइल के बीच 2020 में अब्राहम समझौते के बाद रिश्ते सामान्य हुए थे। दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करते रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यूएई की चेतावनी इस्राइल की खुफिया विफलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। 7 अक्टूबर को हमास ने अचानक हमला किया जिसमें 1200 से ज्यादा इस्राइली मारे गए और 250 से ज्यादा बंधक बना लिए गए। इस बीच इस्राइली मीडिया में चर्चा है कि क्या नेतन्याहू ने चेतावनी को नजरअंदाज किया या फिर उसे गलत समझा। विपक्ष संसद में विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस खुलासे से नेतन्याहू की सरकार पर दबाव और बढ़ेगा। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि चेतावनी मिलने के बाद क्या कदम उठाए गए। इस्राइली सेना के पूर्व प्रमुख गादी आइजनकोट ने कहा कि ऐसी सूचनाओं को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। आने वाले दिनों में इस मामले पर और जानकारी सामने आ सकती है। इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार त्साची हानेग्बी ने पहले कहा था कि 7 अक्टूबर से पहले कोई ठोस चेतावनी नहीं मिली थी। लेकिन यूएई के दावे के बाद उनके बयान पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता से सच छुपा रही है। मानवाधिकार संगठनों ने भी स्वतंत्र जांच की मांग की है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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