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यूपी-बिहार की शादियों की अनोखी रस्म: दूल्हा क्यों छूता है दुल्हन के पैर?

9/9/2026, 5:57:00 am
यूपी-बिहार की शादियों की अनोखी रस्म: दूल्हा क्यों छूता है दुल्हन के पैर?
भारत विविधताओं का देश है और यहाँ हर राज्य की अपनी अनूठी परंपराएं हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार की शादियों में एक ऐसी ही दिलचस्प रस्म देखने को मिलती है, जिसे 'शिलारोहण' कहा जाता है। इस रस्म के दौरान दूल्हा अपनी दुल्हन के पैर छूता है। पहली नज़र में यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन इसके पीछे एक गहरा सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश छिपा है। शिलारोहण शब्द का अर्थ है 'शिला' यानी पत्थर और 'आरोहण' यानी उस पर चढ़ना। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि दुल्हन अब एक नए घर की नींव बनने जा रही है। जैसे एक पत्थर घर को मजबूती देता है, वैसे ही पत्नी को घर की लक्ष्मी और स्थिरता का आधार माना जाता है। जब दूल्हा दुल्हन के पैर छूता है, तो वह वास्तव में उस शक्ति और गरिमा का सम्मान करता है जो एक स्त्री अपने साथ नए घर में लेकर आती है। इस रस्म का एक मुख्य उद्देश्य आपसी सम्मान और विनम्रता की भावना पैदा करना है। यह परंपरा दूल्हे को यह याद दिलाती है कि वैवाहिक जीवन केवल अधिकारों के बारे में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति समर्पण और सम्मान के बारे में है। यह इस बात का संकेत है कि पति अपनी पत्नी को केवल एक जीवनसाथी नहीं, बल्कि जीवन के सफर में एक बराबर की भागीदार और सम्माननीय सदस्य मानता है। आज के आधुनिक दौर में भी यूपी और बिहार के ग्रामीण और शहरी इलाकों में यह रस्म बड़े चाव से निभाई जाती है। हालांकि समय के साथ रीति-रिवाजों के तरीके बदले हैं, लेकिन इस रस्म का मूल भाव आज भी वही है। यह बिना बोले यह संदेश देता है कि एक सफल वैवाहिक जीवन की नींव केवल प्यार पर नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति गहरे सम्मान पर टिकी होती है। यह रस्म पितृसत्तात्मक सोच से परे जाकर स्त्री के महत्व को रेखांकित करती है। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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