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यूपी चुनाव 2027: अखिलेश का नया गेमप्लान, पीडीए के साथ राहुल को सपोर्ट

7/9/2026, 9:14:08 pm
यूपी चुनाव 2027: अखिलेश का नया गेमप्लान, पीडीए के साथ राहुल को सपोर्ट
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यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीडीए (प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस) के साथ मिलकर एक नया रणनीतिक फ्रंट तैयार किया है। उनका दावा है कि इस गठबंधन से छोटे दलों और क्षेत्रीय नेताओं की ताकत जुड़ेगी, जिससे बीजेपी के सामने एक मजबूत विकल्प उभरेगा। पीडीए में छोटे क्षेत्रीय दल जैसे राष्ट्रीय लोकदल, सुभासपा और कुछ समुदाय आधारित संगठन शामिल हैं। इनकी मुख्य मांगें ग्रामीण विकास, युवा रोजगार और सामाजिक न्याय हैं। अखिलेश ने कहा कि इन मुद्दों को केंद्र में रखकर वे मतदाताओं के विश्वास को फिर से हासिल करना चाहते हैं। अखिलेश ने आगे कहा कि राहुल गांधी के लिए समाजवादी पार्टी ही एक विश्वसनीय सहारा बन सकती है। उन्होंने राहुल की नेतृत्व शैली की सराहना करते हुए बताया कि कांग्रेस में हुए बदलाव से दोनों दलों के बीच विचारधारा में निकटता बढ़ी है। इससे दोनों के बीच सीट बंटवारे पर बातचीत आसान हो सकती है। राहुल गांधी ने भी इस संभावना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर सपा उनके साथ आती है तो वे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की उपस्थिति को मजबूत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी के खिलाफ एकजुट luta जरूरी है, और इसके लिए सभी सेक्युलर ताकतों को एक मंच पर लाना होगा। भाजपा ने इस गठबंधन को चुनावी stunt बताते हुए पलटवार किया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि पीडीए जैसा fragmented गठबंधन लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा और जनता विकास कार्यों पर विश्वास करेगी। उन्होंने अपने सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून‑व्यवस्था के रिकॉर्ड को उल्लेख करते हुए कहा कि voteresults में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। विश्लेषकों का मानना है कि अगर पीडीए सफल रहती है तो वह छोटे दलों के संयुक्त ताकत को दिखा सकती है, लेकिन सीट शेयरिंग और नेतृत्व तनाव बड़ी चुनौती रहेंगी। अंत में, चुनाव परिणाम अब भी अनिश्चित हैं, लेकिन साफ है कि 2027 का मुकाबला पहले से ज्यादा बहुआयामी हो गया है। इतिहास को देखें तो पिछले दो चुनावों में सपा‑कांग्रेस गठबंधन ने मिलकर बीजेपी को चुनौती दी थी, लेकिन सीटों का बंटवारा असफल रहा। इस बार दोनों पक्षों ने सबक लेते हुए पहले से ही बातचीत का framework तैयार किया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि अगर समझौता सफल होता है तो ग्रामीण इलाकों में समर्थन में उछाल आ सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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