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अमेरिका का कर्ज 40 खरब डॉलर के पार, ट्रंप की नीतियाँ, ईरान युद्ध और टैक्स कटौती कितनी ज़िम्मेदार?

21/8/2026, 12:15:55 am
अमेरिका का कर्ज 40 खरब डॉलर के पार, ट्रंप की नीतियाँ, ईरान युद्ध और टैक्स कटौती कितनी ज़िम्मेदार?
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अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज अब 40 खरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह आंकड़ा ट्रेजरी विभाग की ताजा रिपोर्ट में सामने आया। पिछले कुछ सालों में कर्ज तेजी से बढ़ा। 2017 में जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने, तब कर्ज करीब 20 खरब डॉलर था। उनके कार्यकाल में टैक्स कटौती, रक्षा खर्च और कोविड राहत पैकेज ने कर्ज को दोगुना कर दिया। ट्रंप प्रशासन ने 2017 के टैक्स कटौती कानून (TCJA) लागू किया। इससे कॉर्पोरेट टैक्स 35% से घटाकर 21% कर दिया गया। राजस्व में गिरावट आई और घाटा बढ़ा। ईरान के साथ तनाव भी खर्च बढ़ाया। 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले के बाद ईरान ने मिसाइल दागे, जिससे सैन्य तैनाती और खुफिया खर्च बढ़े। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह युद्ध‑जैसे हालात कर्ज में 1-2 खरब डॉलर जोड़ चुके हैं। कोविड महामारी ने भी बड़ा असर डाला। 2020‑21 में तीन बड़े राहत पैकेज (CARES, ARP, इन्फ्रास्ट्रक्चर बिल) ने लगभग 5 खरब डॉलर खर्च किए। ये खर्च कर्ज को नई ऊंचाई पर ले गए। वर्तमान बाइडन प्रशासन ने कर्ज सीमा बढ़ाने के लिए कई बार कांग्रेस से मंजूरी ली। लेकिन ब्याज भुगतान अब सालाना 1 खरब डॉलर से ज्यादा हो गया है, जो बजट का बड़ा हिस्सा खा रहा है। अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कर्ज इसी रफ्तार से बढ़ा तो 2030 तक यह 50 खरब डॉलर को छू सकता है। इससे डॉलर की साख, ब्याज दरें और वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर असर पड़ेगा। फिलहाल कांग्रेस में कर्ज सीमा बढ़ाने और खर्च कटौती पर बहस जारी है। दोनों दल अपने‑अपने प्रस्ताव रख रहे हैं, लेकिन सहमति नहीं बन पा रही। कर्ज का बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों और विदेशी सरकारों के पास है। चीन और जापान अब भी सबसे बड़े विदेशी धारक हैं, लेकिन उनकी हिस्सेदारी धीरे‑धीरे घट रही है। बाजार ने इस खबर पर मिली‑जुली प्रतिक्रिया दी। ट्रेजरी यील्ड में मामूली वृद्धि देखी गई, जबकि डॉलर इंडेक्स स्थिर रहा। निवेशक अब कर्ज सीमा समझौते की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भारत के लिए सीधा असर सीमित है, लेकिन वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि से आयात बिल और विदेशी कर्ज की लागत बढ़ सकती है। RBI पहले से ही मुद्रास्फीति पर नज़र रखे हुए है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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