विश्व
अमेरिकी मीडिया की चिंता: ब्रिक्स 2026 में भारत‑चीन का बढ़ता मेलजोल
12/9/2026, 4:45:55 am

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अमेरिकी समाचार पत्र ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 को लेकर लगातार लेख छाप रहे हैं, जिसमें उनका मुख्य ध्यान भारत और चीन के बीच बढ़ते समन्वय पर है। इन प्रकाशनों में ये चिंता जाहिर की गई है कि दोनों एशियाई महाशक्तियों का निकटता से सहयोग दुनिया के राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है।
न्यू यॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों ने हाल के अंक में विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले कुछ महीनों में भारत‑चीन सीमा वार्ता, व्यापार समझौते और संयुक्त तकनीकी परियोजनाओं में तेजी आई है। इस प्रकार के विकास को अमेरिकी विश्लेषक रणनीतिक बदलाव का संकेत मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत और चीन अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों को मिलाकर काम करते हैं तो अमेरिका के लिए indo‑प्रशांत क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करना मुश्किल हो सकता है। वे यह भी चेतावनी देते हैं कि ऐसा सहयोग अमेरिका के नेतृत्व वाले बहुपक्षीय संस्थानों, जैसे कि NATO और QUAD, की प्रासंगिकता को कम कर सकता है।
कुछ संपादकीय में लिखा गया है कि अमेरिका को इस नए समीकरण को स्वीकार करते हुए अपनी रणनीति को फिर से तैयार करना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि वाशिंगटन को भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को गहरा करने के साथ‑साथ चीन के साथ बातचीत के रास्ते भी खोलने चाहिए, ताकि किसी एक पक्ष पर अत्यधिक निर्भरता न बने।
भारत की ओर से सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि देश की विदेश नीति स्वतंत्र और संतुलित रहेगी। उन्होंने बल दिया कि भारत किसी भी देश के साथ सहयोग करता है तो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देता है, और वह किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आएगा।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी समान स्वर में कहा कि बीआरआईसीएस मंच पर सभी सदस्य देशों का समान Participation सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत‑चीन सहयोग से regionales विकास और गरीबी उन्मूलन में तेजी आएगी, जो पूरे दुनिया के हित में है।
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में प्रस्तावित एजेंडा में जलवायु परिवर्तन, डिजिटल व्यापार और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। वे मानते हैं कि यदि भारत और चीन इन क्षेत्रों में संयुक्त पहल करते हैं तो वैश्विक政策 निर्माण पर उनका संयुक्त असर बढ़ेगा।
विश्लेषकों का अनुमान है कि इस प्रकार के सहयोग से विकासशील देशों को वित्तीय और तकनीकी समर्थन मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे पश्चिमी देशों की पारंपरिक援助 मॉडल को चुनौती मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा परिवर्तन धीरे‑धीरे होगा लेकिन इसकी नींव अब रखी जा रही है।
अंत में, अमेरिकी अखबारों ने साफ‑साफ कहा कि वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के नतीजों को बारीकी से देख रहे हैं। वे मानते हैं कि आने वाले महीनों में भारत‑चीन संबंधों के kierunku में जो भी मोड़ आएगा, वह वैश्विक शक्ति संतुलन को आकार देगा, और इसलिए उनकी रिपोर्टिंग जारी रहेगी।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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