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अमेरिकी सीनेटर्स ने भारतीय कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की

10/9/2026, 2:24:02 am
अमेरिकी सीनेटर्स ने भारतीय कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की
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अमेरिकी सीनेट के दो वरिष्ठ सदस्यों ने वाणिज्य विभाग को पत्र लिखकर भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट में डालने की मांग की है। सीनेटरों का आरोप है कि इन कंपनियों ने अमेरिकी नागरिकों, कारोबारियों और सरकारी एजेंसियों का संवेदनशील डेटा बिना स्पष्ट सहमति के एकत्र किया। पत्र में कहा गया है कि डेटा चोरी से राष्ट्रीय सुरक्षा, निजता और आर्थिक हितों को गंभीर खतरा पैदा होता है। उन्होंने वाणिज्य मंत्री से तत्काल जांच शुरू करने और दोषी फर्मों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि सभी डेटा प्रोसेसिंग भारतीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार होती है। भारतीय उद्योग संघों ने भी बयान जारी कर कहा कि कंपनियां डेटा सुरक्षा के लिए कड़े उपाय अपनाती हैं। अमेरिका में डेटा सुरक्षा और निर्यात नियंत्रण कानून बहुत सख्त हैं, जिससे किसी भी विदेशी फर्म पर कार्रवाई का अधिकार होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से द्विपक्षीय व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निवेश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। पिछले वर्ष भी इसी तरह के आरोप लगे थे, लेकिन तब मामला बातचीत से सुलझ गया था। इस बार सीनेटरों ने लिखित मांग के साथ वाणिज्य विभाग को 30 दिन की समयसीमा दी है। वाणिज्य विभाग अब आरोपों की जांच करेगा और फिर निर्णय लेगा कि किन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अगले सप्ताह उच्चस्तरीय बैठक तय है, जिसमें डेटा सुरक्षा ढांचे पर चर्चा होगी। अमेरिकी कांग्रेस की एक समिति ने पिछले साल एक रिपोर्ट में भारतीय आईटी सेक्टर की डेटा प्रथाओं पर सवाल उठाए थे। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि कुछ फर्म्स क्लाउड स्टोरेज और एनालिटिक्स सेवाओं के जरिए अमेरिकी ग्राहकों का डेटा बिना अनुमति साझा करती हैं। भारतीय सरकार ने तब एक संयुक्त कार्यदल गठित किया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैकलिस्ट होने पर भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रवेश करना मुश्किल हो जाएगा। इससे भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि कई नए उद्यम अमेरिकी ग्राहकों पर निर्भर हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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