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अमेरिका ने एशिया से अपना आखिरी विमानवाहक पोत हटाया, ईरान पर फोकस बढ़ा

15/8/2026, 2:13:02 am
अमेरिका ने एशिया से अपना आखिरी विमानवाहक पोत हटाया, ईरान पर फोकस बढ़ा
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अमेरिका ने अपने अंतिम विमानवाहक पोत यूएसएस रोनाल्ड रीगन को एशिया से हटाने का निर्णय लिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का मुख्य लक्ष्य ईरान पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी naval शक्ति को मध्य पूर्व की ओर ले जाना है। इस कदम को ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। पोत को प्रशांत महासागर से वापस बुलाकर अब इसे 페르시안 खाड़ी region में तैनात किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस repositioning से एशिया में अमेरिका की naval presence घटेगी। विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में अमेरिका की carrier strike group की कमी महसूस की जा सकती है। इस खाली जगह का फायदा चीन उठा सकता है, ऐसा कई विश्लेषकों का मानना है। चीन की लोगो की सेना पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण चीन सागर में अपने naval bastion को मजबूत कर रही है। उसने नए विमानवाहक पोत, ड्राइंग बोर्ड पर बन रहे एयरक्राफ्ट और आधुनिक मिसाइल प्रणालियों में निवेश बढ़ाया है। यदि अमेरिका अपनी carrier strike group को हटा देता है, तो बीजिंग को अपना प्रभाव क्षेत्र विस्तार करने का अवसर मिल सकता है। रक्षा विश्लेषक राजेश कुमार ने कहा, "अमेरिका की यह रणनीति एशिया में शक्ति संतुलन को बदल सकती है। चीन के लिए यह एक रणनीतिक लाभ जैसा दिखता है।" उन्होंने आगे कहा कि चीन अपने Naval modernization कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है और जल्द ही अधिक आधुनिक पोतों को तैनात कर सकता है। हालांकि, कुछ विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अमेरिका की प्रतिबद्धता कम नहीं हुई है। वे बताते हैं कि अमेरिका अभी भी जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों के साथ नियमित सैन्य अभ्यास जारी रखेगा। साथ ही, उसने अपने submarine बेड़े और long-range bomber squadron को बढ़ाया है, जिससे वह क्षेत्र में deterrence बनाए रख सके। ट्रंप प्रशासन का फोकस ईरान पर है क्योंकि वह ईरान के uranium enrichment को सीमित करना चाहता है। इसीलिए वह अपनी सैन्य संपत्तियों को मध्य पूर्व की ओर ले जा रहा है, जिससे वह किसी भी संभावित संघर्ष में तेजी से प्रतिक्रिया दे सके। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व News Source: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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