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शी जिनपिंग और पुतिन की दिल्ली में ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन में उपस्थिति

12/9/2026, 11:34:23 am
शी जिनपिंग और पुतिन की दिल्ली में ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन में उपस्थिति
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सप्ताह दिल्ली में ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे हैं. उनके साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी भारत यात्रा पर हैं, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया है. वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में बदलाव के दौर में इस बैठक को कई देशों की नजरें टिकी हुई हैं. शी जिनपिंग की यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करना और नई व्यापारिक पहल पर चर्चा करना है. इस साल के एजेंडा में जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों के लिए वित्तीय संसाधनों तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं. चीन ने पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स मंच को अपनी वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है, इसलिए उसकी उपस्थिति से उम्मीदें बढ़ी हैं. व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा भी इसी संदर्भ में देखी जा रही है. रूस और चीन दोनों ही पश्चिमी देशों के साथ तनावपूर्ण संबंधों के कारण वैकल्पिक समूहों जैसे ब्रिक्स में अधिक सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं. पुतिन ने पिछले महीने मास्को में कहा था कि ब्रिक्स को एक बहुविधात्मक विश्व व्यवस्था का स्तम्भ बनाना चाहिए. उनकी दिल्ली यात्रा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. भारत की मेजबानी में इस शिखर सम्मेलन की सफलता कई पहलुओं पर निर्भर करेगी. पहले, सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की चुनौती है, क्योंकि प्रत्येक देश की प्राथमिकताएँ अलग‑अलग हैं. दूसरे, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आए उथल‑पुथल के चलते ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा आवश्यक होगी. तीसरे, विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने के लिए संस्थागत सुधारों पर सहमति बनाना होगा. विश्लेषकों का मानना है कि यदि शी जिनपिंग और पुतिन दोनों मिलकर स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो ब्रिक्स 2026 का परिणाम वैश्विक शासन में नए मानक स्थापित कर सकता है. हालांकि, पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया और आंतरिक मतभेद इस प्रक्रिया को धीमा भी कर सकते हैं. इस बीच, अन्य ब्रिक्स सदस्य जैसे ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया भी अपने हितों को लेकर सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं. समाप्ति में, दिल्ली में हो रहे इस शिखर सम्मेलन का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी दूरगामी हो सकता है. दुनिया की नज़रें अब उन फैसलों पर टिकी हैं जो आर्थिक सहयोग, जलवायु प्रतिबद्धताओं और राजनीतिक संवाद के भविष्य को आकार देंगे. चर्चा की उम्मीद है कि नए विकास बैंक के सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि सदस्य देशों में आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए धन जुटाया जा सके. प्रतिनिधि नवीकरणीय ऊर्जा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और महामारी तैयारियों पर संयुक्त प्रयासों की भी तलाश कर सकते हैं. पर्यवेक्षकों का कहना है कि दिल्ली में पहुंचा कोई भी समझौता आगामी जी20 बैठकों को प्रभावित कर सकता है और भविष्य के ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों का एजेंडा तय कर सकता है. समाचार स्रोत: BBC हिंदी — мира
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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