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भोटेकोशी नदी में उफान, रसुवा‑नुवाकोट‑धादिंग में हाई अलर्ट
30/8/2026, 1:53:05 am

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भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर से बढ़ गया है और इसने नेपाल के कई जिलों में चेतावनी की घंटी बजा दी है। लगातार मानसूनी बारिश और हिमनदों के पिघलने से नदी का पानी तेजी से उफान पर है। इस स्थिति को देखते हुए रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
स्थानीय प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से निचले बस्तियों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। स्कूल और सामुदायिक केंद्रों को अस्थायी आश्रय स्थल बनाया गया है, जहाँ खाद्य, पीने का पानी और základní चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बाढ़ की संभावना को देखते हुए नेपाल सेना और पुलिस की संयुक्त टीमें नदी के किनारे patrolling कर रही हैं और किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की तैयारी कर रही हैं। साथ ही, हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है ताकि जलस्तर में परिवर्तन की निगरानी की जा सके।
नागरिकों से अपील की गई है कि वे नदी के पास न जाएँ और अनावश्यक यात्रा टालें। जिन क्षेत्रों में पानी भर गया है, वहाँ बिजली की आपूर्ति बंद कर दी गई है ताकि कोई दुर्घटना न हो। साथ ही, संचार नेटवर्क को स्थिर रखने के लिए वैकल्पिक माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है।
भोटेकोशी नदी का जल स्तर पिछले 24 घंटों में लगभग दो मीटर बढ़ा है, जो कि इतिहास में देखे गए उच्चतम स्तरों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही तो नदी का पानी और अधिक बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा और गहरा हो सकता है।
राहत कार्यों में अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी सहयोग प्रदान किया है। नेपाल赤十字 और कुछ UN एजेंसियों ने खाद्य पैकेट, स्वच्छता किट और अस्थायी शरण सामग्री पहुँचाई है। इस बीच, स्थानीय स्वयंसेवक भी राहत शिविरों में काम कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों को मानसिक समर्थन दे रहे हैं।
सरकार ने कहा कि स्थिति सामान्य होने तक सभी आवश्यक सेवाएँ जारी रखी जाएंगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। प्रधानमंत्री ने भी नेपाल के लोगों को आश्वासन दिया है कि हर संभव मदद की जाएगी और बचाव कार्यों में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।
अब तक की रिपोर्ट में किसी बड़ी जानमाल की हानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संपत्ति का नुकसान हो रहा है और कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब पानी का स्तर स्थिर हो जाएगा तो पुनर्निर्माण और क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर हिमालयी नदियों के अस्थिर जल व्यवहार को सामने लाया है और यह दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कैसे क्षेत्रीय पारिस्थितिक तंत्र और मानव बस्तियों पर असर डाल रहे हैं। भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और जागरूकता अभियान को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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