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नेपाल बाढ़: कैलाश यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल, सद्गुरु के फाउंडेशन ने दी सफाई

30/8/2026, 2:53:26 am
नेपाल बाढ़: कैलाश यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल, सद्गुरु के फाउंडेशन ने दी सफाई
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नेपाल में पिछले दिनों आई भारी बारिश और बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर फंसे सैकड़ों तीर्थयात्रियों की जान जोखिम में डाल दी। सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि ऐसे हालात में यात्रा आयोजकों और आध्यात्मिक संस्थाओं ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए। खास तौर पर सद्गुरु और उनके ईशा फाउंडेशन को लेकर चर्चा तेज हुई। फाउंडेशन ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति साफ की। प्रवक्ता ने बताया कि जब नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी बढ़ने लगा, तब सद्गुरु खुद तिब्बत में रुके रहे। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर 700 से ज्यादा ईशा सदस्यों और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का इंतजाम किया। फाउंडेशन का दावा है कि इस काम में स्थानीय प्रशासन और सेना का भी सहयोग लिया गया। नेपाल के हुमला और सिमिकोट इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। वहां सड़कें बह गईं और हेलीकॉप्टर सेवाएं भी कुछ समय के लिए ठप रहीं। ऐसे में पैदल चलकर या घोड़े-खच्चर से यात्रा कर रहे बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए। कई यात्रियों ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई। ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, उनके वालंटियर्स ने खाने-पीने का सामान, दवाएं और गर्म कपड़े बांटे। साथ ही सैटेलाइट फोन के जरिए यात्रियों के परिजनों से संपर्क बनाए रखा। फाउंडेशन ने यह भी कहा कि सद्गुरु ने खुद राहत कार्यों की निगरानी की और हालात सामान्य होने तक तिब्बत नहीं छोड़ा। उधर, नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है। भारतीय दूतावास भी नेपाल प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी कर यात्रियों से सतर्क रहने और आधिकारिक चैनलों से ही जानकारी लेने को कहा है। कैलाश मानसरोवर यात्रा हर साल हजारों भारतीय श्रद्धालु पूरी करते हैं। इस बार की त्रासदी ने यात्रा मार्ग पर बुनियादी ढांचे और आपात इंतजामों की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए भारत-नेपाल-चीन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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