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बिहार में पूर्व माओवादियों पर नजर, पुलिस अलर्ट

29/8/2026, 1:30:00 am
बिहार में पूर्व माओवादियों पर नजर, पुलिस अलर्ट
बिहार पुलिस ने जेल से छूटे पूर्व माओवादियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। विशेष शाखा के अधिकारी हर रोज़ इन लोगों के आवागमन और संपर्कों की जानकारी जुटा रहे हैं। उन्हें जीपीएस ट्रैकर भी दिए गए हैं ताकि उनकी लोकेशन हर पल जानी जा सके। पुलिस मुख्यालय ने एक आदेश जारी कर सभी जिला एसपी को निर्देश दिया है कि वे पूर्व कैदियों के परिवार से नियमित बातचीत करें। इस संवाद का मकसद यह है कि परिवार वाले किसी भी उग्रवादी विचारधारा को बढ़ावा न दें। परिवार वालों को कानूनी सलाह और मनोवैज्ञानिक सहायता भी मुहैया कराई जा रही है। पिछले छह महीने में राज्य के गया, औरंगाबाद और नवादा जैसे जिलों में पूर्व माओवादियों की गतिविधि देखी गई थी। इसके बाद पुलिस ने इन इलाकों में अतिरिक्त चेकपोस्ट और ड्रोन निगरानी लगाई है। साइबर टीम उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर रख रही है ताकि कोई भड़काऊ पोस्ट न डाली जाए। पुलिस महानिदेशक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिहार में उग्रवादी घटनाओं की संख्या पिछले तीन साल में 40 फीसदी घटी है। फिर भी वे किसी भी तरह की ढील नहीं देना चाहते। आंकड़ों के मुताबिक 2022 में केवल 12 उग्रवादी घटनाएं दर्ज हुईं जबकि 2019 में 20 थीं। उन्होंने बताया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत एफआईआर दर्ज होगी और आरोपी को त्वरित न्याय दिलाया जाएगा। कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतें भी सक्रिय हैं। विशेष अदालतों में मुकदमों की सुनवाई 30 दिन के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। सामाजिक कार्यकर्ता और गैर सरकारी संगठन इस पहल का स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पुनर्वास और रोजगार योजनाओं को और मजबूत किया जाए ताकि पूर्व कैदी मुख्यधारा में लौट सकें। कई पूर्व माओवादियों ने खुद आगे आकर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया है। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं जहां युवाओं को शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर बताए जाते हैं। इन शिविरों में महिलाओं के लिए सिलाई और कंप्यूटर प्रशिक्षण भी शामिल हैं। स्थानीय नेता और पुलिस अधिकारी साथ मिलकर बात करते हैं। पुलिस और प्रशासन मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बिहार में उग्रवाद फिर से पांव न पसारे। निगरानी तंत्र को तकनीकी रूप से उन्नत किया जा रहा है ताकि कोई भी सूचना तुरंत मिल सके। नई तकनीक में चेहरे की पहचान और वॉयस रिकग्निशन सिस्टम भी जोड़े गए हैं। राज्य सरकार ने इसके लिए बजट में अतिरिक्त प्रावधान किया है और नए वाहन, संचार उपकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मंजूरी दी है। इसके अलावा ग्रामीण थानों को अतिरिक्त बल और मोबाइल फॉरेंसिक लैब दी गई हैं। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस ने एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया है जिस पर कोई भी गुप्त सूचना दे सकता है। सामुदायिक सहयोग को इस अभियान की सफलता की कुंजी माना जा रहा है। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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