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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: वैश्विक मीडिया ने माना पश्चिम को चुनौती, मतभेद भी बड़ी बाधा

12/9/2026, 10:34:59 pm
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: वैश्विक मीडिया ने माना पश्चिम को चुनौती, मतभेद भी बड़ी बाधा
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ब्रिक्स का ताजा शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में संपन्न हुआ और दुनिया भर के अखबारों, टीवी चैनलों और ऑनलाइन पोर्टल्स ने इसे पश्चिमी देशों के वर्चस्व को सीधी चुनौती बताया। अमेरिका के प्रमुख अखबारों ने लिखा कि ब्रिक्स अब केवल आर्थिक मंच नहीं रहा, बल्कि यह भू‑राजनीतिक ताकत का नया केंद्र बन रहा है। पाकिस्तान के मीडिया ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका मिलकर एक ऐसी आवाज़ उठा रहे हैं जिसे अनसुना करना मुश्किल है। विशेष रूप से, अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि ब्रिक्स की आर्थिक ताकत अब विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के विकल्प के रूप में देखी जा रही है। हालांकि, सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच कई मतभेद खुलकर सामने आए। चीन और भारत के बीच सीमा विवाद, रूस की यूक्रेन नीति पर ब्राजील की असहमति और दक्षिण अफ्रीका की आर्थिक चिंताएं साझा बयान को कमजोर करती रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ये आंतरिक टकराव हल नहीं होते, ब्रिक्स की सामूहिक ताकत केवल कागज़ पर ही रहेगी। इसके अलावा, रूस ने अपने ऊर्जा निर्यात को ब्रिक्स के भीतर नए बाजार खोजने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ब्राजील ने पर्यावरण मानकों का हवाला देकर सहमति नहीं दी। भारत ने इस मंच का उपयोग अपनी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की नीति को आगे बढ़ाने के लिए किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकासशील देशों को अपनी आवाज़ खुद बुलंद करनी होगी और किसी एक शक्ति के दबाव में नहीं आना चाहिए। इस बयान को कई विश्लेषकों ने भारत की विदेश नीति में नई आक्रामकता का संकेत माना। विदेश मंत्री ने भी कहा कि भारत ब्रिक्स के अंदर डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित करने पर जोर देगा, जिससे सदस्य देशों के बीच लेन‑देन आसान हो सके। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने यह भी नोट किया कि ब्रिक्स के विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। अर्जेंटीना, मिस्र, इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसे देशों ने सदस्यता की इच्छा जताई है। यदि ये देश शामिल होते हैं तो समूह का भौगोलिक और आर्थिक दायरा काफी बढ़ जाएगा, लेकिन नए सदस्यों के साथ मतभेद और बढ़ सकते हैं। नए सदस्यों की संभावित एंट्री पर चर्चा के दौरान, चीन ने अपनी ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल को ब्रिक्स के साथ जोड़ने का सुझाव दिया, जिसे कुछ देशों ने सतर्कता से देखा। सारांश में, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने विश्व मंच पर एक स्पष्ट संदेश दिया: पश्चिमी एकाधिकार को चुनौती दी जा सकती है। फिर भी, सदस्य देशों के आपसी मतभेद और अलग‑अलग प्राथमिकताएं इस चुनौती को कितना प्रभावी बनाएंगी, यह भविष्य तय करेगा। अगले साल के शिखर सम्मेलन में इन मुद्दों पर ठोस प्रगति की उम्मीद है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति ही तय करेगी कि ब्रिक्स वास्तव में एक सशक्त वैकल्पिक मंच बन पाता है या नहीं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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