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भारत

ब्रिक्स का विस्तार, पर एकता घटी: भारत के लिए सहमति की चुनौती

8/9/2026, 10:36:35 pm
ब्रिक्स का विस्तार, पर एकता घटी: भारत के लिए सहमति की चुनौती
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ब्रिक्स का आकार बढ़ा, लेकिन एकता घटी। नए सदस्यों के जुड़ने से गुट में 11 देश हो गए हैं, पर साझा सुर मिलना मुश्किल हो रहा है। जोहान्सबर्ग में हुए शिखर सम्मेलन में भारत ने स्पष्ट कहा कि सहमति बिना किसी एक देश के दबाव के बननी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकास, जलवायु और तकनीक पर मिलकर काम करना ही असली ताकत है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी आर्थिक नीतियों को आगे रखा, जबकि ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने दक्षिण‑दक्षिण सहयोग पर जोर दिया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सीरिल रामाफोसा ने अफ्रीकी महाद्वीप की चिंताएँ उठाईं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सुरक्षा मुद्दों पर अलग राय रखी। इतने अलग‑अलग एजेंडा के बीच भारत को मध्यस्थ की भूमिका निभानी पड़ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रिक्स का विस्तार आर्थिक बाजार बड़ा करता है, पर राजनीतिक मतभेद बढ़ाते हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह नए सदस्यों — मिस्र, ईरान, सऊदी अरब, अर्जेंटीना और इथियोपिया — को एक मंच पर लाए बिना पुराने सदस्यों को नाराज़ न करे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि सहमति के लिए नियम‑आधारित प्रक्रिया अपनानी होगी। अगले साल कज़ाख़स्तान में होने वाले शिखर सम्मेलन में यह देखना होगा कि क्या ब्रिक्स एक साझा बयान जारी कर पाता है। अगर सहमति नहीं बनी, तो गुट केवल नाम का रह जाएगा। भारत की कूटनीति अब इस बात पर टिकी है कि वह संतुलन बनाए रखे और सभी सदस्यों की चिंताओं को सुने।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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