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भारत

कच्चा तेल 100 डॉलर पार, पेट्रोल-डीजल फिर महंगे होंगे

8/9/2026, 10:32:15 pm
कच्चा तेल 100 डॉलर पार, पेट्रोल-डीजल फिर महंगे होंगे
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कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल बढ़ी है। इस वृद्धि का सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम पर पड़ने की उम्मीद है। तेल विपणन कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में 4 से 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकती हैं। सरकार ने अभी तक कोई नई सब्सिडी या एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा नहीं की है, इसलिए उपभोक्ताओं पर पूरी लागत पड़ सकती है। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों ही इस समय 100 डॉलर के ऊपर चल रहे हैं, जबकि पिछले हफ्ते ये rates 95 डॉलर के आसपास थे। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक मांग में तेजी, ओपेक प्लस की आपूर्ति सीमा और भू‑राजनीतिक तनाव मिलकर कीमतों को आगे भी ऊपर रख सकते हैं। अगर ये रुख जारी रहा तो आने वाले महीनों में पेट्रोल 6‑8 रुपये और डीजल 5‑7 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। पिछले साल भी जब कच्चा तेल 95 डॉलर तक पहुंचा था, तब पेट्रोल लगभग 5 रुपये और डीजल 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ा था। उस समय सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कुछ कटौती की थी, जिससे उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली थी। इस बार ऐसा कोई कदम नहीं देखा गया है, इसलिए महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। परिवहन क्षेत्र पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत बढ़ेगी और अंततः वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है। कृषि क्षेत्र भी इससे प्रभावित होगा क्योंकि ट्रैक्टर और पंप सेट चलाने के लिए डीज़ल की खपत बहुत अधिक है। अगर डीज़ल के दाम बढ़ते हैं तो सिंचाई लागत बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय पर दबाव पड़ सकता है। इसी तरह, निर्माण और विनिर्माण उद्योग में ऊर्जा खर्च बढ़ेगा, जिससे तैयार माल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। सेवा क्षेत्र, विशेष रूप से लॉजिस्टिक्स और कैब सर्विसेज, भी किराया संरचना में बदलाव कर सकते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक मुद्रास्फीति पर नज़र रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर मौद्रिक नीति में बदलाव कर सकता है। उपभोक्ता संगठनों ने सरकार से तत्काल राहत उपाय, जैसे ईंधन पर कर में कमी या प्रत्यक्ष सब्सिडी, की मांग की है। वे नागरिकों से भी अपील करते हैं कि वे कार‑पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाएं और अनावश्यक यात्राओं से बचें। तेल कंपनियों की दैनिक मूल्य समीक्षा प्रक्रिया के आधार पर, अगले कुछ दिनों में पंप पर नई दरें दिखाई दे सकती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने मासिक बजट में ईंधन खर्च को ध्यान में रखें और यदि संभव हो तो इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भी सोचें। सरकार के पास कुछ विकल्प हैं, जैसे कि पेट्रोलियम सब्सिडी को लक्षित तरीके से देना, या राज्य स्तर पर वैट में अस्थायी कमी करना। हालांकि राजस्व पर असर को देखते हुए ऐसा करना आसान नहीं है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर रहती हैं तो कुछ महीनों बाद स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन तब तक उपभोक्ताओं को सतर्क रहना होगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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