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चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चीन का चांग'ई-7 मिशन: भारत की चंद्रयान-3 से बराबरी की कोशिश

24/8/2026, 12:42:22 am
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चीन का चांग'ई-7 मिशन: भारत की चंद्रयान-3 से बराबरी की कोशिश
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चीन ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपना अगला बड़ा अभियान चांग'ई-7 शुरू करने की घोषणा की है। इस मिशन का मुख्य मकसद वहां मौजूद पानी की बर्फ का पता लगाना और उसका अध्ययन करना है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ध्रुवीय इलाके में बर्फ भविष्य के मानव अभियानों के लिए पानी, ऑक्सीजन और ईंधन का स्रोत बन सकती है। चांग'ई-7 में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर शामिल होंगे। लैंडर ध्रुवीय क्षेत्र में उतरेगा और रोवर सतह पर घूमकर नमूने जमा करेगा। ऑर्बिटर हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे, स्पेक्ट्रोमीटर और रडार से लैस होगा, जो बर्फ के भंडार का विस्तृत नक्शा तैयार करेगा। लैंडर पर एक ड्रिल भी लगाई जाएगी जो कुछ मीटर गहराई तक जाकर बर्फ के नमूने निकाल सके। चीन 2026 की शुरुआत में चांग'ई-7 को लॉन्च करने की योजना बना रहा है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल बर्फ की मौजूदगी की पुष्टि करना है, बल्कि उसके रासायनिक संघटन और वितरण को भी समझना है। भारत ने 2023 में चंद्रयान-3 के साथ दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करके इतिहास रचा था। उस मिशन ने पहली बार ध्रुवीय क्षेत्र में पानी के अणुओं के संकेत दिए थे। चीन अब इसी क्षेत्र में अपने उपकरण भेजकर उन्हीं नतीजों की पुष्टि करना चाहता है और साथ ही अपनी तकनीकी क्षमता दिखाना चाहता है। दोनों देशों के अभियानों में कई समानताएं हैं: दोनों ने सॉफ्ट लैंडिंग, रोवर संचालन और वैज्ञानिक पेलोड का उपयोग किया है। हालांकि चीन का मिशन अधिक विस्तृत ऑर्बिटल सर्वेक्षण पर जोर देता है, जबकि भारत ने लैंडर-रोवर जोड़ी पर ध्यान केंद्रित किया था। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की खोज भविष्य के चंद्र बेस और मंगल अभियानों के लिए निर्णायक होगी। चांग'ई-7 की सफलता चीन को चंद्र संसाधनों की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला सकती है। आने वाले वर्षों में दोनों देशों के अभियान एक-दूसरे को पूरक भी बना सकते हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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