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चीन-मिस्र सैन्य अभ्यास: J-16 लड़ाकू विमानों की तैनाती से भारत की चिंता बढ़ी

25/8/2026, 8:21:23 pm
चीन-मिस्र सैन्य अभ्यास: J-16 लड़ाकू विमानों की तैनाती से भारत की चिंता बढ़ी
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काहिरा के पास चल रहे 'ईगल ऑफ सिविलाइजेशन-2024' अभ्यास में चीन ने अपने सबसे आधुनिक J-16 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान उतारे हैं। यह पहला मौका है जब चीन ने अफ्रीकी धरती पर अपने शीर्ष स्तर के लड़ाकू विमानों के साथ बड़ा हवाई अभ्यास किया है। मिस्र की वायुसेना पहले से राफेल और F-16 जैसे पश्चिमी विमान संचालित करती है, लेकिन J-16 की मौजूदगी नए सामरिक समीकरण बना रही है। भारतीय रक्षा विश्लेषक इस अभ्यास पर करीब से नजर रख रहे हैं। J-16 चीन का सबसे सक्षम लड़ाकू विमान माना जाता है — यह हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्र-रोधी मिशन, सभी में सक्षम है। इसका AESA रडार और लंबी दूरी की मिसाइलें इसे अत्यधिक खतरनाक बनाती हैं। मिस्र के साथ इसकी तैनाती से चीन लाल सागर और हिंद महासागर के प्रवेश द्वार तक अपनी वायुशक्ति का प्रदर्शन कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में चीन और मिस्र के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। बेल्ट एंड रोड पहल के तहत चीन ने मिस्र में भारी निवेश किया है, खासकर स्वेज नहर क्षेत्र में चीनी औद्योगिक पार्क इसके उदाहरण हैं। सैन्य सहयोग भी बढ़ा है — 2023 में दोनों देशों का पहला संयुक्त नौसैनिक अभ्यास हुआ था। अब वायुसेना अभ्यास इस साझेदारी को नया आयाम दे रहा है। भारत के लिए चिंता स्वाभाविक है। हिंद महासागर भारत का पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र रहा है। चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति में मिस्र नया मोती बन सकता है। J-16 की तैनाती से चीन न केवल अपनी पहुंच बढ़ा रहा है, बल्कि मिस्र की वायुसेना को अपने साजो-सामान के साथ जोड़ रहा है। भविष्य में मिस्र चीनी विमानों और रखरखाव तंत्र पर अधिक निर्भर हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित होगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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