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एफिल टावर पर महिला कर्मचारियों को हटाने का विवाद, बीएपीएस ने जताया खेद

8/9/2026, 3:14:34 am
एफिल टावर पर महिला कर्मचारियों को हटाने का विवाद, बीएपीएस ने जताया खेद
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पेरिस के मशहूर एफिल टावर पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर हटाए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। इस विवाद के केंद्र में हिंदू धार्मिक संगठन बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) है, जिसने घटना पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया है। फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीएपीएस ने 7 सितंबर को एफिल टावर के दूसरे तल पर एक निजी सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया था। आरोप है कि कार्यक्रम के आयोजकों ने टावर की कुछ महिला कर्मचारियों को उस क्षेत्र में ड्यूटी करने से रोक दिया या उन्हें वहां से हटने को कहा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में दावा किया गया कि यह कदम धार्मिक मान्यताओं के आधार पर उठाया गया, जिसके बाद लिंगभेद और भेदभाव के आरोप लगे। मामला गर्माने पर बीएपीएस के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता ने 8 सितंबर को बयान जारी कर कहा, "हमें इस घटना का गहरा खेद है। हमारा उद्देश्य कभी किसी का अपमान करना या भेदभाव करना नहीं रहा। किसी भी व्यक्ति — चाहे कर्मचारी हो या आगंतुक — को एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया।" संगठन ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम की व्यवस्था संबंधी कुछ गलतफहमियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते यह भ्रम की स्थिति बनी। पेरिस की मेयर एन हिडाल्गो के कार्यालय ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। एफिल टावर का प्रबंधन करने वाली संस्था 'सेते' (SETE) ने अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक आंतरिक जांच शुरू हो चुकी है। फ्रांस के श्रम कानून लिंग के आधार पर भेदभाव को सख्ती से प्रतिबंधित करते हैं। बीएपीएस गुजरात के बोचासन से निकला एक वैश्विक हिंदू संगठन है, जो सांस्कृतिक, शैक्षिक और मानवीय कार्यक्रम चलाता है। पेरिस में इसके हजारों अनुयायी हैं और पहले भी यहां सार्वजनिक कार्यक्रम होते रहे हैं। संगठन का दावा है कि वह स्थानीय कानूनों और फ्रांसीसी मूल्यों का पूरा सम्मान करता है। इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक स्मारकों पर निजी धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित हो। फ्रांसीसी नारीवादी संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई हो और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बने। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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