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ईपीएफ़ो की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई, जानिए क्या बदलेगा?
16/9/2026, 1:58:04 pm

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केंद्रीय मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफ़ओ) के तहत अनिवार्य पंजीकरण की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का निर्णय लिया गया। इस बदलाव का उद्देश्य अधिक संख्या में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।
पहले वेतन 15,000 रुपये या उससे कम वाले कर्मचारी ही ईपीएफ़ओ में अनिवार्य रूप से शामिल होते थे। अब सीमा बढ़ने से वे वेतनभोगी जो हर महीने 20,000 या 22,000 रुपये कमाते हैं, भी इस योजना के अंतर्गत आएंगे। नियोक्ता को इन कर्मचारियों के लिए अंशदान जमा करना होगा।
सरकार का मानना है कि इस कदम से करोड़ों कर्मचारियों की भविष्य निधि बचत बढ़ेगी और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक कवरेज से धन संचय में तेजी आएगी और राष्ट्रीय बचत दर में सुधार हो सकता है।
नियोक्ताओं की ओर से इस निर्देश पर प्रतिक्रिया मिली-जुली है। बड़े उद्योगपतियों का कहना है कि वे पहले से ही अधिकांश कर्मचारियों को ईपीएफ़ओ में शामिल कर रहे हैं, इसलिए प्रभाव सीमित रहेगा। हालांकि लघु और मध्यम उद्यमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है।
कर्मचारी संघों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका तर्क है कि बढ़ी हुई सीमा से कम वेतन वाले कर्मचारी भी पेंशन और भविष्य निधि के लाभ पा सकेंगे। इससे उनकी दीर्घकालिक आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
कार्यान्वयन के लिए श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिसूचना के प्रकाशन के 30 दिन भीतर नियोक्ताओं को नई सीमा का पालन करना होगा। उल्लंघन की स्थिति में जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बदलाव से अगले वित्त वर्ष में ईपीएफ़ओ के कोष में लगभग दस हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जमा हो सकती है। इससे निधि का निवेश विविधता बढ़ेगी और सदस्यों को बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन का लक्ष्य केवल सीमा बढ़ाना है, लाभ की गणना पद्धति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए 기존 सदस्यों की पेंशन राशि पर असर नहीं पड़ेगा, केवल नए शामिल होने वाले कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
सारांश में, वेतन सीमा बढ़ाने का कदम सामाजिक सुरक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने नियोक्ता समय पर अनुपालन करते हैं और कर्मचारी जागरूक होकर अपने अधिकारों का उपयोग करते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव से आ informal sector में भी बदलाव आएगा क्योंकि कई कंपनियां अब अपने ठेकेदार कर्मचारियों को भी正式 रूप से रखने पर विचार कर सकती हैं। इससे औपचारिक रोजगार की दर में बढ़ोतरी हो सकती है और कर आधार भी मजबूत होगा।
साथ ही, विभाग ने नियोक्ताओं को सुविधा प्रदान करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल अपग्रेड करने की घोषणा की है। अब वेतन विवरण अपलोड करते ही प्रणाली स्वतः सीमा की जाँच करके आवश्यक अंशदान की गणना कर देगी, जिससे मानवीय त्रुटि कम होगी।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — świecie
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
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