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मिस्र के रेगिस्तान में कभी तैरती थीं विशाल शार्क, नए जीवाश्मों ने खोला विकास का राज़

25/8/2026, 4:47:58 am
मिस्र के रेगिस्तान में कभी तैरती थीं विशाल शार्क, नए जीवाश्मों ने खोला विकास का राज़
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मिस्र के पश्चिमी रेगिस्तान में फैले विशाल बालू के टीले आज भले ही सूखे और बंजर दिखें, लेकिन लाखों साल पहले यहाँ एक गहरा और समृद्ध महासागर लहराता था, जहाँ विशाल शार्क मछलियाँ अपनी शिकार की तलाश में तैरती थीं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस क्षेत्र से निकले जीवाश्म अवशेषों का विस्तृत विश्लेषण किया और पाया कि उन शार्कों का आकार आज की किसी भी प्रजाति से कई गुना बड़ा था, कुछ के दांत 15 सेंटीमीटर से अधिक लंबे मिले। वैज्ञानिकों ने दांतों, कशेरुकाओं और जबड़े के टुकड़ों की सूक्ष्म संरचना का अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला कि इन मछलियों का विकास क्रमिक रूप से हुआ — पहले छोटी प्रजातियाँ, फिर मध्यम, और अंत में विशालकाय रूप सामने आए, जिसके बाद जलवायु परिवर्तन ने उन्हें फिर से छोटा बना दिया। भूवैज्ञानिक साक्ष्य बताते हैं कि उस समय समुद्र का स्तर आज के रेगिस्तान से कई किलोमीटर ऊपर था, जिससे विशाल जलीय पारिस्थितिकी तंत्र बना और विविध प्रजातियाँ फली‑फूली। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस क्षेत्र में समुद्री जीवन का विकास धीरे‑धीरे हुआ, जिससे आधुनिक शार्क की विविधता और अनुकूलन क्षमता की नींव पड़ी। नए आंकड़े पुराने सिद्धांतों को चुनौती देते हैं और महाद्वीपीय प्लेटों की गति, समुद्र तल के उतार‑चढ़ाव तथा जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे। अध्ययन दल ने अपने निष्कर्ष प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'पैलियोन्टोलॉजी' में प्रकाशित किए हैं, जिससे दुनिया भर के वैज्ञानिक इस जानकारी का उपयोग आगे के शोध में कर सकेंगे। इस खोज से न केवल मिस्र के भूवैज्ञानिक इतिहास पर नई रोशनी पड़ती है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पृथ्वी की सतह कितनी गतिशील रही है और कैसे जीवन ने लगातार अनुकूलन किया। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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