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गुरुग्राम में बरसात का कहर: प्लानिंग की खामियां क्यों डूबा देती हैं शहर

25/8/2026, 9:01:51 am
गुरुग्राम में बरसात का कहर: प्लानिंग की खामियां क्यों डूबा देती हैं शहर
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गुरुग्राम में हर साल मानसून के पहले कुछ घंटों की बारिश ही सड़कों, बाजारों और आवासीय कॉलोनियों को तालाब में बदल देती है। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में औसतन 30 से अधिक जगहों पर जलभराव की शिकायतें दर्ज हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर की मूल योजना 1970 के दशक में बनी थी, जब आबादी महज कुछ लाख थी। आज 25 लाख से ज्यादा लोग यहां रहते हैं, लेकिन ड्रेनेज नेटवर्क लगभग वही पुराना है। प्राकृतिक नालों और झीलों पर अवैध निर्माण ने पानी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया है। सेक्टर 15, 28, 45 और सोहना रोड के किनारे बने बहुमंजिला भवनों ने पुराने नालों को ढक दिया। नतीजा: बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है और सीवर लाइनें ओवरफ्लो हो जाती हैं। नगर निगम ने पिछले दो साल में 12 नए स्टॉर्म वाटर ड्रेन बनाने का दावा किया है, लेकिन निर्माण की गति धीमी है और कई परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण के विवाद में अटकी हैं। साथ ही, पुराने ड्रेन की सफाई साल में एक बार ही होती है, जिससे कचरा और गाद जमा होकर प्रवाह रोक देते हैं। हरियाणा सरकार ने 2023 में "स्मार्ट ड्रेनेज मिशन" की घोषणा की, जिसमें सेंसर आधारित मॉनिटरिंग और रियल‑टाइम अलर्ट शामिल हैं। परंतु जमीनी स्तर पर अभी तक केवल पायलट प्रोजेक्ट ही शुरू हो पाए हैं। नागरिक संगठन मांग कर रहे हैं कि मास्टर प्लान को फिर से तैयार किया जाए, प्राकृतिक जलमार्गों को संरक्षित किया जाए और अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई हो। जब तक प्लानिंग और रखरखाव में यह अंतर बना रहेगा, गुरुग्राम के निवासियों को हर मानसून में जलभराव का सामना करना पड़ेगा। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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