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हिमालयी राज्यों में पहाड़ों की हर हलचल पकड़ेगा इंटरफेरोमीटर

3/9/2026, 12:17:31 am
हिमालयी राज्यों में पहाड़ों की हर हलचल पकड़ेगा इंटरफेरोमीटर
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हिमालयी राज्यों में भूस्खलन और पहाड़ों की हलचल हमेशा खतरा बनी रहती है। अब वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक इंटरफेरोमीटर का परीक्षण किया है जो पत्थर के छोटे से हिलने पर भी तुरंत सूचना दे सकती है। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में इस उपकरण को लगाया है। इंटरफेरोमीटर लेजर किरणों के माध्यम से जमीन की सूक्ष्म गति को मापता है और डेटा को वास्तविक समय में केंद्रीय सर्वर तक पहुँचाता है। परीक्षण के दौरान एक मामूली चट्टान के खिसकने पर भी सिस्टम ने अलर्ट जारी किया। इससे स्थानीय प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का समय मिला। वैज्ञानिकों का कहना है कि पारंपरिक सिस्मोग्राफ केवल बड़े झटकों को पकड़ पाते हैं, जबकि इंटरफेरोमीटर मिलीमीटर स्तर की हलचल भी पकड़ लेता है। इस तकनीक का लाभ आपदा प्रबंधन, सड़क निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं में भी मिलेगा। हिमाचल के एक अधिकारी ने बताया कि सड़क किनारे लगाए गए सेंसर से भूस्खलन की पूर्व चेतावनी मिलने लगी है। सिक्किम में जलविद्युत बांध की निगरानी के लिए भी इसका उपयोग शुरू हो गया है। हालांकि, उपकरण की लागत और रखरखाव अभी चुनौती है। केंद्र सरकार ने अगले तीन वर्षों में 150 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है ताकि सभी हिमालयी राज्यों में नेटवर्क बिछाया जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह नेटवर्क पूरी तरह काम करे तो पहाड़ों में जान-माल का नुकसान काफी कम हो सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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