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भारत

INS निपुण आज नौसेना में शामिल, 80% स्वदेशी तकनीक से बना

31/8/2026, 4:40:28 am
INS निपुण आज नौसेना में शामिल, 80% स्वदेशी तकनीक से बना
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भारतीय नौसेना ने आज अपने बेड़े में एक नया मज़बूत जुड़ाव जोड़ते हुए डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निपुण को正式 रूप से शामिल कर लिया। यह पोत विशाखापत्तनम के造船厂 में तैयार किया गया और आज उसकी कमीशनिंग समारोह आयोजित किया गया। समारोह में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आईएनएस निपुण के निर्माण में लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री और तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसके मुख्य प्रणाली जैसे propulsions, नेविगेशन और कम्युनिकेशन उपकरण देशी निर्माताओं द्वारा विकसित किए गए हैं। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम हुई है बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ है। पोत सैचुरेशन डाइविंग तकनीक से लैस है, जिससे गोताखोरों को लंबे समय तक गहरे समुद्र में काम करने की सुविधा मिलती है। इसके साथ ही डीएसआरवी (दीप सबमरीन रेस्क्यू वेसल) मदर शिप के रूप में कार्य करते हुए, आईएनएस निपुण पनडुब्बी दुर्घटना की स्थिति में त्वरित बचाव अभियान चलाने में सक्षम है। इस प्रणाली में गहरे पानी में स्थित पनडुब्बियों से कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेष kapsूल और लिफ्ट तंत्र शामिल हैं। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती naval उपस्थिति को देखते हुए ऐसे सक्षम पोत का होना भारत की रणनीतिक स्थिति को मज़बूत करता है। आईएनएस निपुण न केवल समुद्री सुरक्षा निगरानी में मदद करेगा बल्कि समुद्री खोज‑बचाव, underwater सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे भारत की maritime domain awareness में सुधार होगा और आवश्यकता पड़ने पर तेज़ प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी। आपूर्ति श्रृंखला में स्वदेशी भागों का प्रयोग करके निर्माण लागत को भी नियंत्रित रखा गया है, जिससे भविष्य में इसी तरह के अधिक पोत बनाने की संभावना बढ़ती है। आईएनएस निपुण की कमीशनिंग भारतीय navale शक्ति के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और सफल कदम है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्रीय हितों की रक्षा में निरंतर योगदान देगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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