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खेग्रामस योजना: 20 लाख ग्रामीण गरीबों को जोड़ने का लक्ष्य

25/8/2026, 1:56:00 am
खेग्रामस योजना: 20 लाख ग्रामीण गरीबों को जोड़ने का लक्ष्य
बिहार के bettiah जिले से शुरू हुई खेग्रामस योजना का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के 20 लाख ग्रामीण गरीब परिवारों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना की घोषणा राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा की गई है और इसे केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के साथ संयुक्त रूप से कार्यान्वित किया जा रहा है। खेग्रामस के तहत लाभार्थियों को पहला कदम आधारित पहचान प्रदान किया जाता है, जिससे वे बैंक खाता खोलने, सब्सिडी प्राप्त करने और डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। इसके बाद उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाता है, जो कृषि संबद्ध उद्योगों, हस्तशिल्प और छोटे उद्यमों में रोजगार के अवसर खोलता है। प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार हेतु micron ऋण और मार्केटिंग सहायता भी मुहैया कराई जाती है। योजना की निगरानी के लिए जिला स्तर पर एक समिति गठित की गई है, जिसमें स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। यह समिति मासिक आधार पर लाभार्थियों की प्रगति की समीक्षा करती है और आवश्यकतानुसार हस्तक्षेप करती है। वित्तीय पहलू में, राज्य सरकार ने शुरुआती चरण के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से dodatk वित्तीय सहायता प्राप्त की जा रही है। प्रारंभिक चरण में bettiah और पड़ोसी जिलों के लगभग दो लाख परिवारों को योजना से जोड़ा गया है। अधिकारियों का कहना है कि अगले दो वर्षों में शेष लाभार्थियों को भी कवर कर लिया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर में noteworthy कमी आएगी। सामाजिक प्रभाव की बात करें तो योजना से महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि देखने को मिली है, क्योंकि विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण और वित्तीय समर्थन दिया जा रहा है। योजना में स्वास्थ्य घटक भी शामिल है; लाभार्थी परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच और टीकाकरण शिविर लगवाने की सुविधा दी जाती है। इन शिविरों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स ग्रामीण गावों तक पहुँचती हैं और गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की पोषण स्तर पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी तरह, डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत प्रत्येक पंचायत में एक सामान्य सेवा केंद्र स्थापित किया गया है, जहाँ युवा और बुजुर्ग दोनों को आधार लिंक्ड भुगतान, ऑनलाइन सेवा申し込み और ई-शिक्षा के बुनियादी कौशल सिखाए जाते हैं। कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी आई हैं, जैसे दूरदराज के गावों में conectividad की कमी और स्थानीय नेताओं में योजना की जानकारी की सीमित समझ। इनका समाधान करने के लिए प्रशिक्षण 워크शॉप और जागरूकता रैलियाँ नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। लाभार्थियों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर योजना के दिशानिर्देशों में समय‑समय पर संशोधन किए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। खेग्रामस की सफलता को मापने के लिए राज्य सरकार ने एक स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसी की नियुक्ति की है, जो वार्षिक आधार पर आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभाव का आकलन करेगी। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, योजना से जुड़े परिवारों की औसत मासिक आय में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और स्कूली बच्चों की उपस्थिति में भी सुधार देखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि present tempo बरकरार रहा, तो 2025 तक लक्ष्यित 20 लाख परिवारों तक पहुँचना संभव है। समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)

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